गर्भावस्था में हो रही कमजोरी, चक्कर और थकान? एनीमिया हो सकता है कारण, जानें क्या करें

Divya Rai
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Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Anemia During Pregnancy: गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं को कमजोरी, चक्कर आना, थकान और सांस फूलने जैसी समस्याएं होती हैं. अगर ये लक्षण लगातार बने रहें, तो इसका कारण एनीमिया भी हो सकता है. एनीमिया (शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी) गर्भावस्था में मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए गंभीर समस्या बन सकती है. यह न केवल महिलाओं को रोजमर्रा के कामों में थकावट और कमजोरी महसूस कराता है, बल्कि बच्चे के विकास और वजन पर भी असर डाल सकता है.

आयरन की कमी के कारण होता है एनीमिया

एनीमिया के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन गर्भावस्था में यह सबसे ज्यादा आयरन की कमी के कारण होता है. गर्भावस्था के दौरान शरीर और प्लेसेंटा के विकास के लिए अधिक लाल रक्त कोशिकाओं की जरूरत होती है, जिससे आयरन की मांग बढ़ जाती है. अगर महिलाओं की डाइट में पर्याप्त आयरन नहीं है या पहले से ही उनके शरीर में आयरन की कमी है, तो एनीमिया होने की संभावना बढ़ जाती है. इसके अलावा, लगातार प्रेग्नेंसी, छोटी अंतराल पर गर्भधारण और पर्याप्त एंटी-नेटल केयर न मिलने जैसी वजहें भी एनीमिया को बढ़ावा देती हैं.

जानिए क्या हैं लक्षण Anemia During Pregnancy

एनीमिया के कुछ आम लक्षण हैं जैसे लगातार थकान, चक्कर आना, सांस फूलना, धड़कन तेज या अनियमित होना, त्वचा, होंठ और नाखूनों का पीला पड़ना, ठंडे हाथ-पैर, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और चिड़चिड़ापन. अगर हीमोग्लोबिन लेवल 10.9 ग्राम/डीएल से कम हो, तो इसे गंभीर माना जाता है.

सही खानपान बहुत जरूरी है

गर्भावस्था में एनीमिया से निपटने के लिए सबसे पहले सही खानपान बहुत जरूरी है. खाने में आयरन युक्त चीजें शामिल करें जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, ड्राई फ्रूट्स, मूली के पत्ते या ड्रमस्टिक के पत्ते. इसके अलावा अमरूद, खजूर, आंवला और अंकुरित अनाज भी लाभकारी हैं. फोलिक एसिड युक्त चीजें जैसे गेहूं, बीन्स और संतरा भी डाइट में शामिल करें. सब्जियों में गाजर, चुकंदर, कच्चा केला और फलों में सेब, अंगूर, चीकू, केला और अनार को शामिल करना भी फायदेमंद होता है. आयुर्वेद में भी एनीमिया के लिए कुछ असरदार दवाइयां हैं जैसे पुनर्नवादि मंडूर.

मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है

हालांकि अगर हीमोग्लोबिन 7 ग्राम/डीएल से कम हो या एक महीने तक सही उपचार के बाद भी बढ़ोतरी न हो या महिला में कोई ब्लीडिंग डिसऑर्डर हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. एनीमिया सिर्फ कमजोरी का कारण नहीं है, बल्कि मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है.

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