डेंगू के इन लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज, बुखार के बाद स्ट्रोक की देते हैं चेतावनी

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Health Care: आमतौर पर डेंगू होने पर व्यक्ति को बुखार, बदन दर्द और सिरदर्द के लक्षण महसूस होते हैं. साथ ही प्लेटलेट्स भी तेजी से कम हो जाते हैं, लेकिन डेंगू के गंभीर होने पर यह कुछ मामलों में शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकता है. जिनमें ब्रेन और नर्वस सिस्टम से जुड़ी जटिलताएं दुर्लभ लेकिन गंभीर हो सकती हैं.

इनमें एन्सीफ्लोपैथी, एन्सीफ्लाइटिस, दौरे पड़ना और इंट्राक्रानियल ब्लीडिंग जैसी समस्याएं शामिल हैं. वहीं, कुछ मामलों में इस्केमिक स्ट्रोक या हेमोरेजिक स्ट्रोक भी रिपोर्ट हुए हैं. लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि डेंगू होने का मतलब ब्रेन स्ट्रोक होना नहीं है. अधिकांश मरीज बिना ऐसी स्थिति के ठीक हो जाते हैं. इसलिए डरने के बजाय यह समझना जरूरी है कि किन परिस्थितियों में दिमाग से जुड़े लक्षण गंभीर संकेत हो सकते हैं.

क्या डेंगू से ब्रेन और नर्वस सिस्टम हो सकते हैं प्रभावित ?

डेंगू के कुछ मामलों में ब्रेन और नर्वस सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं. डेंगू वायरस इंफेक्शन के दौरान नर्वस सिस्टम अलग-अलग तरीकों से प्रभावित हो सकता है. हालांकि कुछ जोखिम सीधे न्यूरोलॉजिक्ल के साथ जुड़े हो सकते हैं, जबकि कुछ गंभीर डेंगू में ब्लीडिंग, शॉक, मेटाबॉलिक असमानताएं या अंग के खराब होने के कारण दिखाई दे सकती हैं.

डेंगू के गंभीर मामले में ज्यादा ब्लीडिंग और अंगों का काम न करना, जिसमें चेतना में कमी भी शामिल है, यह सभी गंभीर बीमारी के संकेत हैं. बीमारी के महत्वपूर्ण चरण में, खासकर बुखार कम होने के आसपास, जोखिम विकसित हो सकते हैं.

एक हालिया रिव्यू में डेंगू से जुड़े न्यरोलॉजिकल जोखिमों में स्पाइन कोर्ड के जुड़ाव जैसी दुर्लभ समस्याओं को भी दर्ज किया गया है. इससे पता चलता है कि डेंगू का न्यूरोलॉजिकल प्रभाव व्यापक हो सकता है, हालांकि इनमें से अधिकांश जोखिम में समानताएं नहीं होती है.

डेंगू और स्ट्रोक के बीच संबंध 

डेंगू और स्ट्रोक का संबंध मुख्य रूप से दो तरह से समझा जाता है, जिसमें ब्रेन में ब्लीडिंग (hemorrhagic stroke) और ब्रेन की ब्लड वैसल्स में ब्लॉकेज के कारण इस्केमिक स्ट्रोक.

डेंगू की गंभीर स्थिति में प्लेटलेट्स तेजी से कम हो सकते हैं और ब्लड क्लॉटिंग सिस्टम भी प्रभावित हो सकता है। इसके साथ गंभीर बीमारी के दौरान होने वाले अन्य बदलाव ब्लीडिंग का जोखिम बढ़ा सकते हैं। दूसरी तरफ, डिहाइड्रेशन, शॉक और जमावट असामान्यताएं जैसे कारक भी रक्त संचार को प्रभावित कर सकते हैं.

2025 में हुए अलग-अलग अध्ययनों में करीब 2,861 मरीज शामिल थे और रिव्यू में इंट्रासेरेब्रल रक्तस्राव की दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल जटिलता को संबंधित पाया. इसलिए डेंगू और स्ट्रोक के बीच संबंध संभव है, लेकिन इसे सामान्य जोखिम नहीं माना जाना चाहिए.

ब्रेन से जुड़े हो सकते हैं कौन से जोखिम ?

डेंगू में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के पीछे केवल एक कारण जिम्मेदार नहीं होता। गंभीर इंफेक्शन में कई प्रक्रियाएं एक साथ भूमिका निभा सकती हैं.

1. प्लेटलेट्स काउंट में कमी

डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स काउंट तेजी से कम होना आम है. इससे ब्लीडिंग की संभावना बढ़ सकती है, लेकिन केवल प्लेटलेट्स काउंट कम देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि मरीज को ब्रेन ब्लीडिंग होने वाली है.

2. ब्लड क्लॉटिंग में गड़बड़ी

डेंगू के गंभीर मामलों में ब्लीडिंग में ब्लड रोकने वाली प्रक्रिया प्रभावित हो सकता है. यदि ब्लीडिंग के साथ क्लॉटिंग गड़बड़ी भी मौजूद हों, तो गंभीर हेमरेज (hemorrhage) का जोखिम बढ़ सकता है.

3. प्लाज्मा लिकेज और शॉक

डेंगू की गंभीर स्थिति में ब्लड वैसल्स से फ्लूइड लिकेज होने पर ब्लड प्रेशर गिर सकता हैऔर शॉक की स्थिति पैदा हो सकती है। लंबे समय तक शॉक शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है.मेटाबॉलिक असमानताओं के अलावा, कुछ न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं में वायरस के तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव या संक्रमण के प्रति प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की भूमिका हो सकती है.

डेंगू केवल प्लेटलेट्स कम होने वाली बीमारी नहीं है. गंभीर मामलों में ब्लीडिंग, शॉक और ऑर्गन डिस्फंक्शन के साथ दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं भी हो सकती हैं. ब्रेन हेमरेज और स्ट्रोक डेंगू में संभव हैं, लेकिन बहुत असामान्य हैं और हर डेंगू मरीज में इनका खतरा नहीं होता.

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