भारत ने हेल्थ सेक्टर में हासिल की एक और बड़ी उपलब्धि, 80 लाख से ज्यादा HPV टीकाकरण हुए पूरे

New Delhi: भारत ने हेल्थ सेक्टर में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है. देश में 80 लाख से ज्यादा एचपीवी टीकाकरण पूरे हो चुके हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी जानकारी एक्स पर पोस्ट के जरिए दी है. मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा कि भारत ने 80 लाख एचपीवी टीकाकरण का आंकड़ा पार कर लिया है, जो प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को मजबूत करने और एचपीवी संक्रमण और इससे जुड़े कैंसर से सुरक्षा को आगे बढ़ाने में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.

वैक्सीन एक सुरक्षित और बेहद असरदार टीका

हर टीकाकरण के साथ भारत अपनी बेटियों के लिए एक स्वस्थ, कैंसर-मुक्त भविष्य की ओर एक और कदम बढ़ा रहा है. एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीन एक सुरक्षित और बेहद असरदार टीका है. यह उन संक्रमणों को रोकता है जो सर्वाइकल कैंसर, एनल और गले के कैंसर के साथ-साथ जननांग में मस्से का कारण बनते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, यह वैक्सीन हाई-रिस्क एचपीवी स्ट्रेन से बचाती है, जो 90 प्रतिशत तक सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं.

9 से 14 साल की उम्र के लिए सबसे अच्छी

यह लंबे समय तक सुरक्षा देती है और कैंसर से पहले होने वाले सेल बदलावों को रोकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्सीन सबसे ज्यादा असरदार 9 से 14 साल की उम्र के लिए यह सबसे अच्छी मानी जाती है. इस उम्र में आमतौर पर 2 डोज की जरूरत होती है. भारत के राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत सिंगल-डोज अप्रोच भी अपनाई जा रही है. वहीं, 15 से 26 साल और कुछ वयस्कों के लिए 45 साल तक के लोगों को कैच-अप के तौर पर 3 डोज दी जाती है, जो छह महीने के अंदर पूरी की जाती है.

ग्लोबल स्तर पर व्यापक निगरानी

बड़ी उम्र के टीनएजर्स और वयस्कों को भी इसका फायदा मिलता है, हालांकि सबसे अच्छा असर वायरस के संपर्क में आने से पहले होता है. विशेषज्ञों के मुताबिक ग्लोबल स्तर पर व्यापक निगरानी से यह साबित हुआ है कि यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और इससे कोई लॉन्ग टर्म हेल्थ प्रॉब्लम नहीं होती. इसके कुछ सामान्य हल्के साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, लालिमा या सूजन, हल्का बुखार, सिरदर्द या थकान. ये कुछ समय में खुद ठीक हो जाते हैं.

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