Cinnamon Benefits: खाने का स्वाद बढ़ाने वाली दालचीनी सेहत के लिए भी मानी जाती है फायदेमंद, जानिए इसके पारंपरिक उपयोग

Shivam
Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Must Read
Shivam
Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Cinnamon Benefits: भारतीय रसोई में दालचीनी की खुशबू आते ही चाय, पुलाव और बिरयानी जैसे व्यंजनों का स्वाद याद आ जाता है. लेकिन यह सुगंधित मसाला सिर्फ खाने का जायका बढ़ाने तक सीमित नहीं है. आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में दालचीनी का इस्तेमाल लंबे समय से कई स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए किया जाता रहा है. इसकी छाल में मौजूद प्राकृतिक यौगिकों और एंटीऑक्सीडेंट्स के कारण इसे उपयोगी मसालों में शामिल किया जाता है.

क्या है दालचीनी और कहां होती है इसकी खेती?

दालचीनी एक सदाबहार वृक्ष है, जिसकी ऊंचाई करीब 15 से 20 मीटर तक हो सकती है. इसका सबसे उपयोगी हिस्सा इसकी सुगंधित छाल होती है. छाल को सुखाकर मसाले के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. श्रीलंका को असली दालचीनी का प्रमुख मूल स्थान माना जाता है. भारत में भी केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के पश्चिमी घाट वाले क्षेत्रों में इसकी खेती की जाती है.

पाचन के लिए पारंपरिक रूप से किया जाता है इस्तेमाल

आयुर्वेद में दालचीनी को गर्म तासीर वाला मसाला माना जाता है. पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल पाचन को बेहतर रखने के लिए किया जाता रहा है. गैस, अपच और पेट फूलने जैसी सामान्य पाचन संबंधी परेशानियों में भी दालचीनी के इस्तेमाल का उल्लेख मिलता है. माना जाता है कि दालचीनी पाचक रसों के स्राव को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है, जिसके चलते पाचन प्रक्रिया को सहारा मिल सकता है.

एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर है दालचीनी

दालचीनी में पॉलीफेनोल जैसे प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं. ये शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव में भूमिका निभाते हैं. इसी वजह से दालचीनी को एंटीऑक्सीडेंट गुणों वाला मसाला माना जाता है. हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज या बीमारी से पूरी तरह बचाव करने वाली औषधि के तौर पर नहीं देखना चाहिए. इसके स्वास्थ्य लाभों को लेकर वैज्ञानिक शोध जारी हैं.

जोड़ों और सूजन में भी पारंपरिक इस्तेमाल

दालचीनी का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा में जोड़ों और मांसपेशियों से जुड़ी परेशानी के लिए भी किया जाता रहा है. इसमें मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिकों के संभावित एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभावों पर शोध हुआ है. पारंपरिक रूप से दालचीनी को तेल या लेप के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि किसी दर्द या सूजन की लगातार समस्या होने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है.

सर्दी-जुकाम में भी लोकप्रिय है दालचीनी

सर्दी, खांसी और गले से जुड़ी सामान्य परेशानी के दौरान दालचीनी का काढ़ा या शहद के साथ इसका सेवन घरेलू नुस्खे के तौर पर काफी लोकप्रिय है. इसकी गर्म तासीर के कारण इसे ठंड के मौसम में विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, सर्दी-जुकाम या खांसी के गंभीर अथवा लंबे समय तक बने रहने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.

चाय से लेकर बिरयानी तक में होता है इस्तेमाल

दालचीनी भारतीय रसोई में कई तरह से इस्तेमाल होती है. चाय, कहवा, पुलाव, बिरयानी और मिठाइयों में इसकी थोड़ी सी मात्रा भी स्वाद और खुशबू को काफी बदल देती है. आयुर्वेदिक परंपरा में दालचीनी को त्रिदोष से संबंधित संतुलन के लिए उपयोग किए जाने वाले मसालों में गिना जाता है. विशेष रूप से कफ और वात को संतुलित करने के संदर्भ में इसका उल्लेख मिलता है.

कितनी दालचीनी खानी चाहिए?

दालचीनी का इस्तेमाल हमेशा संतुलित मात्रा में करना चाहिए. ज्यादा मात्रा में या लंबे समय तक इसका सेवन करना उचित नहीं माना जाता. दालचीनी की अलग-अलग किस्मों में कूमारिन की मात्रा भी अलग हो सकती है, इसलिए इसे औषधि की तरह अधिक मात्रा में लेने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है. खाने में सामान्य मसाले के रूप में सीमित मात्रा में इस्तेमाल की जाने वाली दालचीनी स्वाद के साथ-साथ पारंपरिक रूप से कई स्वास्थ्य लाभों से जुड़ी रही है.

यह भी पढ़े: Diesel Price: पेट्रोल पंप पर डीजल खरीदने की लगी लिमिट, जानिए एक दिन में कितने लीटर मिलेगा

Latest News

Earthquake: भूकंप के झटकों से कांपी इंडोनेशिया की धरती, लोग घरों से बाहर निकले, जाने कितनी रही तीव्रता

Indonesia Earthquake: रविवार सुबह भूकंप के झटकों से इंडोनेशिया की धरती कांप उठी. भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर...

More Articles Like This