Desi Freezer: बिजली के बिना हफ्तों तक ताजी रहेंगी सब्जियां, बांस और बोरी से घर पर ऐसे बनाएं देसी फ्रीजर

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Desi Freezer: बारिश का मौसम आते ही गांवों से लेकर शहरों तक बिजली कटौती की समस्या बढ़ जाती है. ऐसे में सबसे ज्यादा चिंता फ्रिज में रखे फल और सब्जियों को लेकर होती है, क्योंकि लंबे समय तक बिजली न रहने पर इनके खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बांस, बोरी और पानी की मदद से बिना बिजली के भी एक ऐसा देसी कूलिंग सिस्टम तैयार किया जा सकता है, जो सब्जियों को लंबे समय तक ताजा रखने में मदद कर सकता है?

सुनने में यह तरीका किसी साधारण देसी जुगाड़ जैसा लग सकता है, लेकिन इसके पीछे बाकायदा विज्ञान काम करता है. इस तकनीक में बिजली, कंप्रेसर या किसी महंगे उपकरण की जरूरत नहीं होती. बांस का ढांचा, टाट या बोरी का कपड़ा और पानी मिलकर अंदर प्राकृतिक ठंडक पैदा करते हैं. इसी वजह से इसे बिजली कटौती वाले इलाकों में फल और सब्जियों को सुरक्षित रखने के एक उपयोगी तरीके के रूप में देखा जा सकता है.

इवेपोरेटिव कूलिंग से कैसे पैदा होती है प्राकृतिक ठंडक?

इस देसी फ्रीजर के पीछे इवेपोरेटिव कूलिंग यानी वाष्पीकरण से ठंडक पैदा होने का सिद्धांत काम करता है. जब पानी धीरे-धीरे भाप बनकर हवा में उड़ता है, तो वह आसपास की गर्मी को अपने साथ खींच लेता है. इस प्रक्रिया से तापमान कम होने लगता है. इसे रोजमर्रा के उदाहरण से भी समझा जा सकता है. गीला कपड़ा सूखते समय ठंडा महसूस होता है और मटके में रखा पानी सामान्य बर्तन के मुकाबले ठंडा रहता है. इसकी वजह भी पानी का धीरे-धीरे वाष्पित होना है. बांस और बोरी से तैयार कूलर में इसी प्राकृतिक प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है.

बांस और गीली बोरी मिलकर कैसे बनाते हैं ठंडा बक्सा?

इस सिस्टम में सबसे पहले बांस की मदद से टोकरी या बक्से जैसा ढांचा बनाया जाता है. इसके बाद चारों तरफ बोरी या टाट का कपड़ा लपेट दिया जाता है. बोरी को पानी की मदद से लगातार गीला रखा जाता है. जैसे ही बोरी में मौजूद पानी भाप बनकर उड़ने लगता है, वह आसपास की गर्मी को सोखता है. इससे ढांचे के अंदर का तापमान बाहर के मुकाबले कम होने लगता है. इसके साथ अंदर नमी भी बढ़ती है, जो सब्जियों को ताजा रखने में मदद करती है.

इस पूरी व्यवस्था में सबसे अहम भूमिका पानी और हवा की होती है. बोरी का नम रहना और उसके आसपास हवा की आवाजाही बने रहना जरूरी है. अगर बोरी सूख जाए, तो वाष्पीकरण की प्रक्रिया कमजोर पड़ जाएगी और ठंडक का असर भी कम हो जाएगा.

रिसर्च में पांच दिन के मुकाबले 19 दिन तक ताजा रहे टमाटर

बांस और बोरी से तैयार इस कूलर की जांच एक रिसर्च में भी की गई. परीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने टमाटर को अलग-अलग परिस्थितियों में रखकर देखा. इस दौरान सामान्य कमरे के तापमान पर रखे गए टमाटर सिर्फ पांच दिन में खराब हो गए. वहीं, बांस-बोरी कूलर में रखे गए टमाटर पूरे 19 दिन तक ताजा बने रहे. इस परीक्षण में दोनों स्थितियों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला. रिसर्च में यह कूलर करीब 82 प्रतिशत तक ठंडक देने में सक्षम पाया गया. यानी साधारण बांस, बोरी और पानी से तैयार यह व्यवस्था सही परिस्थितियों में फल और सब्जियों को अधिक समय तक ताजा रखने में मदद कर सकती है.

घर पर कैसे बनाएं यह देसी फ्रीजर?

इस देसी फ्रीजर को तैयार करना ज्यादा मुश्किल नहीं है और इसके लिए महंगे सामान की भी जरूरत नहीं होती. इसे बनाने के लिए मुख्य रूप से बांस की डंडियां, टाट या बोरी का कपड़ा, थोड़ी रस्सी और पानी चाहिए. सबसे पहले बांस की डंडियों से एक टोकरी या बक्से जैसा ढांचा तैयार करें. ढांचा ऐसा होना चाहिए, जिसमें फल और सब्जियां आसानी से रखी जा सकें. इसके बाद उसके चारों तरफ बोरी या टाट के कपड़े को अच्छी तरह लपेट दें. बोरी को इस तरह बांधें कि वह ढांचे के आसपास ठीक से लगी रहे. इसके लिए रस्सी का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके बाद कपड़े को पानी से गीला करें, ताकि वाष्पीकरण की प्रक्रिया शुरू हो सके.

ऊपर पानी का बर्तन रखकर बनाए रख सकते हैं नमी

बोरी को लगातार नम रखने के लिए ढांचे के ऊपर पानी से भरा एक बर्तन रखा जा सकता है. व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि पानी धीरे-धीरे बोरी तक पहुंचता रहे और उसे गीला बनाए रखे. अगर ऊपर पानी का बर्तन रखना संभव न हो, तो दिन में दो से तीन बार बोरी पर पानी का छिड़काव किया जा सकता है. मुख्य बात यह है कि बोरी पूरी तरह सूखने न पाए. जितनी देर तक बोरी नम रहेगी और पानी का वाष्पीकरण होता रहेगा, उतनी देर तक अंदर प्राकृतिक ठंडक बनाए रखने में मदद मिलेगी.

छांव में रखना बेहद जरूरी

इस देसी फ्रीजर को सही जगह पर रखना भी उतना ही जरूरी है जितना इसे सही तरीके से बनाना. इसे हमेशा छांव वाली जगह पर रखें. सीधी धूप में रखने से पानी तेजी से सूख सकता है और अंदर ठंडक बनाए रखना मुश्किल हो सकता है. इसके साथ जगह हवादार होनी चाहिए, ताकि हवा आसानी से अंदर-बाहर हो सके. हवा की आवाजाही से गीली बोरी में मौजूद पानी के भाप बनने की प्रक्रिया चलती रहती है. इसी प्रक्रिया के कारण अंदर का तापमान कम होता है.

बोरी सूखी तो कम हो जाएगा ठंडक का असर

इस देसी कूलिंग सिस्टम का सबसे जरूरी नियम है कि बोरी को सूखने न दिया जाए. अगर बोरी में नमी नहीं रहेगी, तो पानी का वाष्पीकरण भी नहीं होगा और प्राकृतिक ठंडक पैदा करने की प्रक्रिया कमजोर पड़ जाएगी. इसलिए समय-समय पर बोरी की नमी जांचते रहें. जरूरत पड़ने पर पानी का छिड़काव करें या ऊपर रखे पानी के बर्तन की स्थिति देखें. खासतौर पर गर्म या तेज हवा वाले मौसम में बोरी जल्दी सूख सकती है.

बांस, बोरी और पानी से तैयार होने वाला यह देसी फ्रीजर बिजली के बिना काम करता है. इवेपोरेटिव कूलिंग के सिद्धांत पर आधारित यह तरीका सही ढंग से इस्तेमाल करने पर फल और सब्जियों को लंबे समय तक ताजा रखने में मदद कर सकता है. खासकर बिजली कटौती के दौरान यह साधारण तकनीक भोजन की बर्बादी कम करने में उपयोगी साबित हो सकती है.

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