fibre in our diet: जब भी हेल्दी डाइट की बात आती है तो सबसे पहले ध्यान प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स पर ही जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि फाइबर भी रोजाना डाइट के लिए आवश्यक होते हैं. दरअसल, फ्रूट, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, नट्स और सीड्स जैसे आहार से मिलने वाला फाइबर शरीर को कई तरह से सपोर्ट करता है. हालांकि, फाइबर जितना ज्यादा, उतना बेहतर यह सोचना भी सही नहीं है. अचानक बहुत अधिक फाइबर लेने से कुछ लोगों को गैस, ब्लोटिंग, पेट में ऐंठन या स्टूल में बदलाव जैसी परेशानी हो सकती है. इसलिए पेट की समस्याओं को दूर करने के लिए फाइबर सही मात्रा में लेना आवश्यक है.
फाइबर क्या है
बता दें कि डाइटरी फाइबर मुख्य रूप से प्लांट फूड्स में पाया जाने वाला ऐसा कार्बोहाइड्रेट है जिसे शरीर के डाइजेस्टिव एंजाइम्स पूरी तरह तोड़कर अवशोषित नहीं कर पाते, जिसके कारण फाइबर दूसरे कार्बोहाइड्रेट की तरह पूरी तरह छोटे मॉलिक्यूल्स में बदलकर छोटी आंत में अवशोषित नहीं होता. वहीं, कुछ फाइबर लगभग बिना पचे डाइजेस्टिव ट्रैक्ट से आगे बढ़ते हैं, जबकि कुछ प्रकार के फाइबर को बड़ी आंत (Large Intestine) में मौजूद गट बैक्टीरिया फर्मेंट कर सकते हैं. इस प्रक्रिया में कुछ शॉर्ट चैन फैटी एसिड्स जैसे कम्पाउंड्स बन सकते हैं, जिनका गट एंवॉयरमेंटल और शरीर के मेटाबॉलिज्म से संबंध पाया गया है.
रोजाना डाइट में फाइबर की जरूरत?
फाइबर का सबसे जाना-पहचाना फायदा डाइजेस्टिव हेल्थ से जुड़ा है. यह स्टूल में ब्लक बढ़ाने, उसकी निरंतरता को बेहतर करने और बाउल मूवमेंट को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ने के साथ मल त्याग में निरंतरता के साथ नरम होने, मल को जोड़ने और बाउल की फ्रीक्वेंसी बढ़ने तथा गट ट्रांसिट टाइम कम होने के बीच संबंध पाया गया. हालांकि सामान्य स्वस्थ लोगों में इसका प्रभाव सामान्य होता है.
बता दें कि फाइबर केवल कब्ज के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है. हाई फाइबर फूड्स जैसे फ्रूट्स, सब्जी, दालें, और साबुत अनाज अक्सर विटामिन्स, मिनरल्स और अन्य प्लांट कम्पाउंड्स भी मिलते हैं. इसलिए रोजाना की डाइट में फाइबर रिच संपूर्ण आहार को शामिल करना हेल्दी इटिंग पैर्टन का हिस्सा माना जाता है.
सॉल्यूबल और इनसॉल्यूबल फाइबर में अंतर
फाइबर को समझने का एक आसान तरीका है— सॉल्यूबल और इनसॉल्यूबल.
सॉल्यूबल फाइबर पानी के संपर्क में आकर जेल की तरह बना जाता है. यह ऑट्स, बीन्स, दालें और कुछ फलों और सीडस् जैसे आहार में पाया जाता है. कुछ सॉल्यूबल फाइबर्स को गट बैक्टीरिया फर्मेंट भी कर सकते हैं. इसी कारण इनका गट माइक्रोबायोम के साथ खास संबंध माना जाता है.
जबकि इनसॉल्यूबल फाइबर पानी में आसानी से घूल नहीं पाता है. यह साबूत अनाज, और कई तरह की सब्जियों में पाया जाता है. यह मल में जोड़ने (साथ में इकट्ठा करने) और डाइजेस्टिव ट्रैक्ट में उसके मूवमेंट को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को अधिक से अधिक इनसॉल्यूबल फाइबर लेना चाहिए. फाइबर का सही प्रकार और मात्रा व्यक्ति के डाइजेस्टिव लक्षण के अनुसार अलग हो सकती है.
रोजाना कितना फाइबर लेना पर्याप्त माना जाता है?
अधिकांश वयस्कों के लिए रोजाना लगभग 22–34 ग्राम फाइबर एक सामान्य गाइडलाइन है. वहीं, वास्तविक जरूरत उम्र, महिला या पुरुष, टोटल कैलोरी इनटेक और व्यक्तिगत स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुसार बदल सकती है. उदाहरण के लिए फाइबर बढ़ाने के लिए एक ही समय में बहुत ज्यादा फाइबर सप्लीमेंट्स लेने के बजाय रोजाना की डाइट में धीरे-धीरे बदलाव किया जा सकता है, इससे कब्ज की समस्या में आराम मिलता है.
क्या ज्यादा फाइबर खाना ओवरडोज माना जाता है?
फाइबर के लिए विटामिन्स या कुछ मिनरल्स की तरह कोई निर्धारित टॉलरेटेड अपर इनटेक लेवल निर्धारित नहीं है. लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि फाइबर की अधिक मात्रा सभी के लिए सुरक्षित या सहज होगी.
बहुत ज्यादा फाइबर, खासकर अचानक बढ़ाने पर, गैस, ब्लोटिंग, पेट में असहजता पेट में ऐठन और मल त्याग के पैटर्न मे बदलाव हो सकता है. कुछ लोगों में ज्यादा फाइबर वाले आहार गैस और कब्ज को बढ़ा सकते हैं. इसलिए फाइबर का ओवरडोज शब्द तकनीकी रूप से सही नहीं है. फिलहाल, जरूरत से ज्यादा फाइबर लेने से भी आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
फाइबर रोजाना की बैलेंस्ड डाइट का जरूरी हिस्सा है और यह बाउल मूवमेंट, मल त्याग करने तथा डाइजेस्टिव हेल्थ को सपोर्ट कर सकता है. वयस्कों के लिए आमतौर पर 22–34 ग्राम फाइबर प्रतिदिन एक उपयोगी गाइडलाइन है, लेकिन व्यक्तिगत जरूरत अलग हो सकती है. फाइबर को फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, नट्स और सीड्स जैसे संपूर्ण आहार से लेना बेहतर है.