छोटे बच्चों में बढ़ रहा स्किनकेयर और मेकअप का क्रेज, त्‍वचा को कर सकता है डैमेज; जानिए क्‍या है डॉक्‍टरों की सलाह

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Kids skincare: बच्चा जब प्यार से कोई बात कहे, तो ऐसी कोई वजह नहीं दिखती है, जिससे पैरेंट्स उनकी बात न मानें. बच्चों के चेहरें पर बिखरी मुस्‍कान से पैरेट्स का दिल भी खुश हो जाता है. बच्चों की इन्हीं छोटी-मोटी ज़िद में से एक होती है मेकअप करने की ज़िद. घर की सारी महिलाएं, मम्मी, दीदी और चाची को मेकअप करती देख घर की छोटी बच्चियां भी मेकअप करने की जिद करने लगती है. लेकिन क्‍या आपको पता है कि बच्‍चों की इन छोटी-छोटी जिदों को पूरा करना उनकी सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकता है.

बच्‍चों की मानसिकता पर पड़ रहा प्रभाव

छोटे बच्चों में स्किनकेयर करने के बढ़ते चलन का सबसे बड़ा कारण सोशल मीडिया है, जिसे लेकर मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और उन पर मौजूद वीडियो का प्रभाव सीधे बच्चों पर पड़ रहा है, क्योंकि सोशल मीडिया के जरिए बच्चों को बहुत आसानी से मेकअप और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स मिल जाते हैं और वे अपने पेरेंट्स को इन प्रोडक्ट्स और स्किनकेयर रूटीन को फॉलो करते हुए देखते हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक, सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव की वजह से बचपन और जवानी के बीच जो रेखा थी, वह धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है. इसका असर छोटे बच्चों की मानसिकता पर भी पड़ रहा है, क्योंकि अब बच्चे भी अपनी अहमियत को दूसरों द्वारा की गई तारीफों से आंकने लगे हैं.

क्‍या करें पैरेंट्स?

ऐसे में मनोवैज्ञानिकों ने पैरेंट्स को इस मुद्दें पर खास ध्‍यान देने की सलाह दी है. उनका कहना है कि यदि आपका बच्‍चा स्किनकेयर या ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने की जिद करता है, तो उसे डांटने या सख्ती करने के बजाय प्यार से समझाने की सलाह दी गई है, क्योंकि अगर पेरेंट्स बच्चों पर सख्ती करेंगे, तो स्वाभाविक रूप से बच्चे उसी काम को करने की जिद करेंगे.

माता-पिता को डॉक्‍टरों की सलाह है कि बच्चों को ब्यूटी प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल की बजाय फेसवॉश और मॉइस्चराइजर के उपयोग की इजाजत दें और उन्हें मेकअप करने के बजाय शरीर की स्वच्छता और बुनियादी स्किनकेयर पर ध्यान देना सिखाएं.

बच्चों के लिए बढ़ता स्किनकेयर मार्केट

दरअसल, आज के समय में बच्चों को भी ‘ग्लास स्किन’ चाहिए और वे अपने पेरेंट्स से महंगे से महंगे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स खरीदने की जिद करते हैं. इसी बढ़ती मांग को देखते हुए ‘ग्लोबल कॉस्मेटिक इंडस्ट्री रिपोर्ट’ के अनुसार बच्चों का स्किनकेयर मार्केट सालाना 1.5 बिलियन डॉलर से अधिक की कमाई कर रहा है.

आपको बता दें कि भारत में ही करीब 6 कंपनियां ऐसी हैं, जो बच्चों के लिए कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स का निर्माण कर रही हैं और उन्हें बाजार में उतार रही हैं. यदि आप ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर देखें, तो कम से कम 60 से ज्यादा ऐसे प्रोडक्ट्स बेचे जा रहे हैं, जो सिर्फ बच्चों के स्किनकेयर के लिए हैं.

क्‍यों बच्चों को नहीं करना चाहिए मेकअप

डैमेज हो सकती है स्किन:-

बच्चे की स्किन बहुत सॉफ्ट और सेंसिटिव होती है. ऐसे में यदि उस पर केमिकल युक्त चीज़ों का इस्तेमाल किया गया, तो यह उनकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं. मेकअप से होने वाली समस्याओं में बच्चे की स्किन पर रैशेज़, खुजली और जलन जैसी समस्याएं हो सकती है.

शरीर के अंदर जा सकते हैं टॉक्सिन:-

बच्चों की ज़िद पर यदि आप उन्‍हें लिपस्टिक लगा देती हैं, तो आपको पता होना चाहिए कि बच्चों का मेटाबॉलिज़्म बड़ों की तुलना में अधिक होता है, जिसकी वजह से उनकी अब्सॉर्प्शन होते पॉवर बड़ों की तुलना में 10% अधिक होती है. केमिकल युक्त लिपस्टिक या कॉस्मेटिक उनकी त्वचा पर तेज़ी से अब्सॉर्ब होते हैं, जिसकी वजह से उन्हें त्वचा की समस्याएं हो सकती हैं.

बच्चे को हो सकती है ड्राई स्किन की समस्या:-

लगातार मेकअप करने की वजह से बच्चे की स्किन ड्राई हो सकती है. ऐसे में उन्हें त्वचा पर खुजली की समस्या भी शुरू हो सकती है, इसलिए बच्चों को मेकअप करने से पहले इससे होने वाले नुकसान को समझना बेहद ज़रूरी है.

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