रेल मंत्रालय ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत बैकुंठ से उरकुरा के बीच 26.40 किलोमीटर लंबी चौथी रेलवे लाइन के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की है. इस परियोजना पर लगभग ₹426.01 करोड़ की लागत आएगी. बैकुंठ–उरकुरा खंड बिलासपुर–रायपुर–नागपुर मुख्य रेल मार्ग का अहम हिस्सा है. यह मार्ग मुंबई–हावड़ा उच्च घनत्व वाले रेलवे नेटवर्क में भी शामिल है, जिसे देश के सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोरों में गिना जाता है.
वर्तमान समय में यह रेल खंड अपनी अधिकतम क्षमता पर संचालित हो रहा है, जिससे क्षमता विस्तार की तात्कालिक आवश्यकता स्पष्ट होती है. स्वीकृत चौथी रेलवे लाइन के निर्माण से ट्रेनों की भीड़ में उल्लेखनीय कमी आएगी और रेल संचालन अधिक सुचारू हो सकेगा. इस परियोजना के पूर्ण होने पर अतिरिक्त यात्री और कोच सेवाओं का संचालन संभव होगा, देरी की समस्या कम होगी तथा इस अत्यंत व्यस्त खंड पर ट्रेनों की समयबद्धता में भी सुधार आएगा.
कोयला, बिजली और सीमेंट सेक्टर को मिलेगा फायदा
यात्रियों को मिलने वाले लाभों के अलावा, इस परियोजना से प्रति वर्ष लगभग 14.25 मिलियन टन (एमटीपीए) अतिरिक्त माल ढुलाई की सुविधा मिलने की उम्मीद है. माल ढुलाई क्षमता में इस वृद्धि से भारतीय रेलवे को चालू होने के पहले वर्ष से ही लगभग ₹61.70 करोड़ की अतिरिक्त वार्षिक आय होने का अनुमान है .
इस क्षेत्र में बिजली संयंत्रों, कोयला खदानों, इस्पात और सीमेंट इकाइयों का तेजी से विस्तार हुआ है. साथ ही नए और संबद्ध उद्योगों का भी विकास हुआ है. यह नई लाइन थोक वस्तुओं के तेज और अधिक विश्वसनीय परिवहन को सुनिश्चित करेगी, जिससे औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत होंगी.
चौथी लाइन से यात्रा होगी आसान
इस परियोजना को ऊर्जा, सीमेंट एवं खनिज गलियारे के अंतर्गत चिन्हित किया गया है, जो उच्च यातायात वाले तथा आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को सशक्त करने पर भारतीय रेलवे के सतत फोकस को दर्शाता है. परियोजना के पूर्ण होने के बाद बैकुंठ–उरकुरा के बीच प्रस्तावित चौथी रेलवे लाइन यात्रियों के लिए यात्रा को अधिक तेज, सुविधाजनक और भरोसेमंद बनाएगी. साथ ही, माल परिवहन क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे क्षेत्रीय उद्योगों को गति मिलेगी और समग्र आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी.