Bihar Day 2026: ज्ञान, परंपरा, संघर्ष और शौर्य की धरती बिहार के लिए 22 मार्च का दिन बेहद खास होता है. इसी दिन साल 1912 में बिहार बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग होकर एक स्वतंत्र राज्य के रूप में अस्तित्व में आया था. आज बिहार अपना 114वां स्थापना दिवस मना रहा है. यह दिन सिर्फ एक ऐतिहासिक तारीख नहीं, बल्कि बिहार की समृद्ध विरासत, सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है.
पिछले 114 वर्षों में बिहार ने देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को ऐसे महान व्यक्तित्व दिए हैं, जिन्होंने हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई. राजनीति, साहित्य, उद्योग, संगीत और खेल — हर जगह बिहार के लोगों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. बिहार दिवस के इस खास मौके पर आइए जानते हैं उन 5 महान हस्तियों के बारे में, जिनकी सफलता की कहानी आज भी करोड़ों युवाओं को प्रेरित करती है.
भारत के पहले राष्ट्रपति: डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने रखी लोकतंत्र की मजबूत नींव
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बिहार की धरती ने भारत को पहला राष्ट्रपति देने का गौरव हासिल किया. सीवान जिले के जीरादेई में जन्मे डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक थे. उन्होंने महात्मा गांधी के साथ मिलकर देश की आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई. आजादी के बाद जब भारत एक नए राष्ट्र के रूप में उभरा, तब डॉ. राजेंद्र प्रसाद को देश का पहला राष्ट्रपति चुना गया. वे हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, फारसी और बंगला जैसी कई भाषाओं के विद्वान थे. संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव मजबूत की. करीब 12 वर्षों तक राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उन्होंने देश के विकास और एकता को नई दिशा दी.
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर: वीर रस के कवि जिन्होंने साहित्य को नई ऊंचाई दी
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बेगूसराय जिले के सिमरिया गांव में जन्मे रामधारी सिंह दिनकर हिंदी साहित्य के ऐसे महान कवि थे, जिन्हें ‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि दी गई. उनकी कविताओं में देशभक्ति, शौर्य और आत्मसम्मान की भावना झलकती है. ‘रश्मिरथी’ और ‘कुरुक्षेत्र’ जैसी कालजयी रचनाओं ने उन्हें अमर बना दिया. उनकी लेखनी ने युवाओं में ऊर्जा और आत्मविश्वास भरने का काम किया. वर्ष 1973 में उन्हें उनकी कृति ‘उर्वशी’ के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसके अलावा उन्हें पद्म भूषण से भी नवाजा गया. वे शिक्षक, राज्यसभा सदस्य और कुलपति जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे.
अनिल अग्रवाल: संघर्ष से सफलता तक, बने वेदांता ग्रुप के चेयरमैन
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पटना में जन्मे अनिल अग्रवाल आज वैश्विक उद्योग जगत का बड़ा नाम हैं. वे वेदांता ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन हैं. उन्होंने बहुत ही साधारण स्तर से अपने करियर की शुरुआत की थी. कबाड़ के छोटे व्यापार से शुरुआत करने वाले अनिल अग्रवाल ने अपनी मेहनत और दूरदर्शिता के दम पर एक विशाल उद्योग साम्राज्य खड़ा किया. आज उनकी कंपनी मेटल और माइनिंग सेक्टर में दुनिया की प्रमुख कंपनियों में गिनी जाती है. वे अक्सर कहते हैं कि वे जहां भी रहें, उनकी जड़ें बिहार से ही जुड़ी हैं. उनकी सफलता की कहानी आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है.
शारदा सिन्हा: लोक संगीत के जरिए दुनिया तक पहुंची बिहार की संस्कृति
सुपौल जिले के हुलास गांव में जन्मी शारदा सिन्हा को ‘बिहार कोकिला’ के नाम से जाना जाता है. उन्होंने भोजपुरी, मगही और हिंदी में कई प्रसिद्ध लोकगीत गाए हैं. छठ महापर्व के गीतों को देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक पहुंचाने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है. उनकी मधुर आवाज ने बिहार की संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई. उन्हें पद्म भूषण जैसे सम्मान से नवाजा गया. आज भी उनके गीत छठ पूजा के दौरान हर घर में गूंजते हैं और उनके बिना यह पर्व अधूरा सा लगता है.
ईशान किशन: क्रिकेट में बिहार का चमकता सितारा
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नवादा जिले में जन्मे ईशान किशन आज भारतीय क्रिकेट का एक उभरता हुआ सितारा हैं. अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और तेज खेल के लिए जाने जाने वाले ईशान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कई रिकॉर्ड बनाए हैं. उन्होंने 126 गेंदों में दोहरा शतक लगाकर इतिहास रच दिया. IPL और अंतरराष्ट्रीय मैचों में उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता जा रहा है. ईशान किशन बिहार के उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो खेल के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं.
बिहार दिवस: सिर्फ उत्सव नहीं, पहचान और प्रेरणा का प्रतीक
बिहार का 114 साल का सफर संघर्ष, संस्कृति, प्रतिभा और सफलता की एक लंबी कहानी है. यहां की मिट्टी ने हर दौर में ऐसे रत्न दिए हैं, जिन्होंने देश और दुनिया में अपनी पहचान बनाई. आज बिहार दिवस हमें अपनी जड़ों से जुड़ने, अपनी विरासत को समझने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है. यह दिन हर बिहारी के लिए गर्व का प्रतीक है.
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