कोविड-19 महामारी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुई है कि अब एक नए वेरिएंट BA.3.2, जिसे ‘सिकाडा’ नाम दिया गया है, ने दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है. यह वेरिएंट अब तक अमेरिका समेत 23 देशों में फैल चुका है और कई जगहों पर इसके संक्रमण के संकेत तेजी से सामने आ रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि यह वेरिएंट अपने अंदर इतने ज्यादा बदलाव लेकर आया है कि इसे सामान्य वेरिएंट्स की तरह समझना आसान नहीं है. यही वजह है कि इसे लेकर वैश्विक स्तर पर निगरानी और रिसर्च तेज कर दी गई है.
70 से ज्यादा म्यूटेशन, इसलिए अलग और खतरनाक
वैज्ञानिकों के अनुसार, सिकाडा वेरिएंट में 70 से 75 तक आनुवंशिक बदलाव (Genetic Mutations) पाए गए हैं. ये बदलाव खासतौर पर इसके स्पाइक प्रोटीन में हुए हैं, जो वायरस का सबसे अहम हिस्सा होता है.
स्पाइक प्रोटीन ही वह माध्यम है, जिसके जरिए वायरस मानव शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश करता है. जब इस हिस्से में इतने बड़े बदलाव होते हैं, तो वायरस की पहचान करना इम्यून सिस्टम के लिए कठिन हो जाता है. यही कारण है कि इस वेरिएंट को ‘इम्यून एस्केप’ क्षमता वाला माना जा रहा है.
वैक्सीन को चकमा देने की क्षमता
अब तक जो वैक्सीन बनाई गई हैं, वे पुराने वेरिएंट्स जैसे JN.1 को पहचानने और उनसे लड़ने में सक्षम थीं. लेकिन सिकाडा वेरिएंट के बदले हुए स्वरूप के कारण यह आशंका जताई जा रही है कि यह वैक्सीन की पहचान से बच सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह वेरिएंट शरीर के इम्यून सिस्टम के लिए किसी ‘अजनबी’ की तरह है, जिसे पहचानने में समय लगता है. इस दौरान वायरस तेजी से शरीर में फैल सकता है.
अमेरिका में सीवेज से मिला बड़ा संकेत
इस वेरिएंट की सबसे पहले पहचान नवंबर 2024 में अफ्रीका में हुई थी, लेकिन 2026 तक आते-आते इसने वैश्विक स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है. अमेरिका में ‘वेस्टवॉटर सर्विलांस’ के दौरान इसके सक्रिय अंश मिले हैं. 29 राज्यों में सीवेज के पानी में इसके निशान मिलने से यह साफ हो गया है कि संक्रमण चुपचाप फैल रहा है. भले ही अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या अभी ज्यादा न हो, लेकिन समुदाय में इसका प्रसार तेजी से हो रहा है.
फैलने की रफ्तार सबसे बड़ी चिंता
पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक यह साफ नहीं है कि यह वेरिएंट ज्यादा जानलेवा है या नहीं, लेकिन इसकी फैलने की क्षमता बेहद ज्यादा हो सकती है. अगर संक्रमण की रफ्तार इसी तरह बढ़ती रही, तो कम समय में बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है.
भारत में क्या है मौजूदा स्थिति
भारत में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं. INSACOG के अनुसार देश में XFG वेरिएंट के 163 मामले सामने आए हैं, जो ओमिक्रॉन का ही एक रूप है.
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा के कारण सिकाडा वेरिएंट का भारत में प्रवेश लगभग तय है. ऐसे में समय रहते तैयार रहना जरूरी हो गया है.
हाइब्रिड इम्यूनिटी दे सकती है कुछ राहत
भारत की बड़ी आबादी में ‘हाइब्रिड इम्यूनिटी’ मौजूद है, यानी वैक्सीन और पिछले संक्रमण दोनों से मिली सुरक्षा. यह एक तरह का सुरक्षा कवच बन सकती है, जो गंभीर स्थिति से बचाने में मदद करेगी. फिर भी, जिन लोगों को पहले से फेफड़ों की बीमारी है या जो लॉन्ग कोविड से जूझ चुके हैं, उन्हें ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है.
वैक्सीन की प्रभावशीलता पर सवाल
चूंकि सिकाडा वेरिएंट का स्पाइक प्रोटीन काफी बदल चुका है, इसलिए मौजूदा बूस्टर डोज इसके खिलाफ पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सकते. हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि वैक्सीन अभी भी गंभीर बीमारी और मृत्यु के जोखिम को कम करने में मदद कर रही है, जो एक बड़ी राहत की बात है.
लॉन्ग कोविड का बढ़ता खतरा
डेटा के मुताबिक, हर 100 संक्रमित लोगों में से करीब 3 लोगों में लॉन्ग कोविड के लक्षण विकसित हो रहे हैं. यह स्थिति लंबे समय तक शरीर को प्रभावित कर सकती है और व्यक्ति की कार्यक्षमता को कम कर सकती है.
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वेरिएंट से बचने के लिए सावधानी बेहद जरूरी है.
- भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना
- हाथों की साफ-सफाई बनाए रखना
- बीमार होने पर तुरंत जांच कराना
- कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी रखना
ये सभी उपाय संक्रमण से बचाव में मदद कर सकते हैं.
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