इसे चमत्कार कहें या व्यवस्था की गंभीर लापरवाही, लेकिन शेखपुरा में हुई इस घटना ने सभी को स्तब्ध कर दिया. एक बुजुर्ग को मृत घोषित कर पोस्टमार्टम के लिए रवाना कर दिया गया, मगर अस्पताल पहुंचने से पहले ही कहानी पलट गई. एंबुलेंस के भीतर बुजुर्ग के अचानक उठकर दाढ़ी खुजलाने से मौके पर मौजूद लोग सन्न रह गए.
यात्रियों की सूचना पर बुजुर्ग को ट्रेन से उतारा गया
मंगलवार को झाझा–गया पैसेंजर ट्रेन के शेखपुरा स्टेशन पहुंचते ही यात्रियों ने जीआरपी को सूचना दी कि एक बुजुर्ग यात्री बोगी में अचेत अवस्था में पड़े हैं. सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने बिना चिकित्सकीय जांच के बुजुर्ग को मृत मान लिया और आनन-फानन में ट्रेन से उतार लिया गया.
शव वाहन से सदर अस्पताल भेजा गया बुजुर्ग
पुलिस ने औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर बुजुर्ग को शव वाहन में रखकर सदर अस्पताल भेज दिया. अस्पताल पहुंचते ही बुजुर्ग को पोस्टमार्टम हाउस ले जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई. किसी को जरा भी आभास नहीं था कि यहीं से इस मामले में चौंकाने वाला मोड़ आने वाला है.
एंबुलेंस में उठकर खुजलाने लगे दाढ़ी
पोस्टमार्टम हाउस पहुंचने से पहले ही अचानक एंबुलेंस के भीतर बुजुर्ग उठकर बैठ गए और दाढ़ी खुजलाने लगे. यह दृश्य देखकर वाहन चालक घबरा गया और उसके हाथ-पांव फूल गए. उसने तुरंत डॉक्टरों को इसकी सूचना दी.
डॉक्टरों ने की जांच, चल रही थी नब्ज
सूचना मिलते ही ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर पहुंचे और जांच की. जांच में बुजुर्ग की नब्ज चलती मिली. इसके बाद तुरंत उन्हें इलाज के लिए भर्ती किया गया. बुजुर्ग की पहचान 66 वर्षीय सीतो सिंह के रूप में हुई है, जो अरियरी प्रखंड के कसर गांव के निवासी बताए जा रहे हैं.
किडनी मरीज, सफर में बिगड़ी हालत
होश में आने पर बुजुर्ग ने बताया कि वे किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं और इलाज के सिलसिले में यात्रा कर रहे थे. इसी दौरान रास्ते में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए, जिसे यात्रियों ने उन्हें मृत समझ लिया.
पुलिस-स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
इस घटना ने पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बिना चिकित्सकीय जांच किसी व्यक्ति को मृत घोषित करना और पोस्टमार्टम के लिए भेज देना, बड़ी लापरवाही मानी जा रही है.
चर्चा का विषय बनी घटना
शेखपुरा में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. कुछ लोग इसे ‘जिंदा आदमी का पोस्टमार्टम’ होने से बचा चमत्कार मान रहे हैं, जबकि कई इसे व्यवस्था की गंभीर खामियों का आईना बता रहे हैं.

