Delhi NCR Air Taxi: दिल्ली-एनसीआर की जाम से जूझती सड़कों पर रोज घंटों फंसे रहने वाले लोगों के लिए एक संभावित राहत की खबर सामने आई है. भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने ऐसी योजना का प्रस्ताव रखा है, जो लागू होने पर गुरुग्राम से कनॉट प्लेस (CP) या जेवर एयरपोर्ट की दूरी कुछ ही मिनटों में तय करने का रास्ता खोल सकती है. सीआईआई की रिपोर्ट में e-VTOL (इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग) तकनीक पर आधारित एयर टैक्सी सेवा शुरू करने की सिफारिश की गई है, जो बिना लंबे रनवे के सीधे ऊपर उड़ान भरकर और उतरकर शहरी हवाई परिवहन को संभव बना सकती है.
क्या है e-VTOL और कैसे करेगा काम?
इस योजना के तहत ऐसे एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल होगा जो हेलीकॉप्टर की तरह सीधे ऊपर उठकर उड़ान भर सकते हैं और नीचे उतर सकते हैं. इन्हें टेक-ऑफ या लैंडिंग के लिए लंबे रनवे की जरूरत नहीं होगी. रिपोर्ट में गुरुग्राम, कनॉट प्लेस और जेवर एयरपोर्ट के बीच एक समर्पित एयर कॉरिडोर विकसित करने का सुझाव दिया गया है. यदि यह परियोजना जमीन पर उतरती है, तो मौजूदा 1 से 2 घंटे का सड़क सफर घटकर मात्र 10 से 15 मिनट में पूरा किया जा सकेगा, जिससे शहरी यात्रा का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है.
DGCA के नियम क्या हैं ?
एविएशन एक्सपर्ट डॉ. सुभाष गोयल का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर का एयरस्पेस पहले से ही काफी व्यस्त है. ऐसे में एयर टैक्सी के लिए अलग से एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट, नए रूट और एटीसी (ATC) सिस्टम की जरूरत होगी. डॉ. गोयल के मुताबिक, DGCA को e-VTOL के लिए अलग से सुरक्षा मानक, लाइसेंसिंग प्रक्रिया और इमरजेंसी प्रोटोकॉल बनाने होंगे. खराब मौसम में उड़ान भरने के लिए ऑटोनॉमस कंट्रोल और इमरजेंसी लैंडिंग की व्यवस्था बेहद जरूरी होगी. साथ ही बैटरी रेंज और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी काम करना होगा ताकि एक दिन में कई उड़ानें संभव हो सकें.
आम आदमी की जेब पर पड़ेगा भारी?
इकोनॉमिक एक्सपर्ट आकाश जिंदल का मानना है कि शुरुआत में यह सेवा महंगी हो सकती है. आम आदमी के लिए इसका किराया ज्यादा हो सकता है, लेकिन जैसे-जैसे इसका दायरा बढ़ेगा और ज्यादा लोग इसका इस्तेमाल करेंगे, किराए में कमी आ सकती है. इसके लिए सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर फंडिंग मॉडल और सब्सिडी पर काम करना होगा.
भविष्य की राह और सवाल
यह परियोजना जितनी आकर्षक और भविष्यवादी प्रतीत होती है, उसे वास्तविकता में बदलना उतना ही जटिल होगा. शोर प्रदूषण, एयर ट्रैफिक कंट्रोल के साथ समन्वय, कड़े सुरक्षा मानक और व्यापक वर्टीपोर्ट नेटवर्क का निर्माण जैसी चुनौतियां आसान नहीं हैं. फिलहाल यह योजना प्रस्ताव और प्रारंभिक योजना चरण में है. आगे देखना होगा कि क्या सरकार और संबंधित एजेंसियां तकनीकी व नियामकीय अड़चनों को दूर कर दिल्ली-एनसीआर के ट्रैफिक संकट के समाधान के लिए आसमानी मार्ग को व्यवहारिक बना पाती हैं.
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