India-US Trade Deal Framework: व्हाइट हाउस ने सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का 2026 का व्यापार नीति एजेंडा पेश किया, जिसमें कहा गया, “अमेरिका वापस आ गया है.” एजेंडे में टैरिफ को और गहरा करने, व्यापार कानूनों को सख्ती से लागू करने तथा प्रमुख समझौतों पर फिर से बातचीत करने का वादा किया गया.
मानव इतिहास का सबसे बड़ा व्यापार घाटा चल रहा
2026 के एजेंडे में कहा गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में इस समय मानव इतिहास का सबसे बड़ा व्यापार घाटा चल रहा है. हाइपर-ग्लोबलाइजेशन के दौर में 50 लाख मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां विदेश चली गईं और 70 हजार से अधिक कारखाने बंद हो गए. इसमें कहा गया है कि वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार घाटा 2020 से बाइडेन प्रशासन के अंत तक 40 प्रतिशत बढ़ गया.
हर महीने वस्तुओं का व्यापार घाटा साल-दर-साल घटा India-US Trade Deal Framework
व्यापार को आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का केंद्र बताते हुए एजेंडे में कहा गया कि संयुक्त राज्य को उसी का अधिक उत्पादन करना चाहिए जिसका वह उपभोग करता है. कहा गया कि “मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और उनसे संबंधित सेवाओं में उत्पादन से अधिक वेतन, अधिक नवाचार और अधिक राष्ट्रीय सुरक्षा मिलती है. प्रशासन ने अपने टैरिफ-आधारित दृष्टिकोण को शुरुआती सफलता का श्रेय दिया है. उसके अनुसार, अप्रैल 2025 से दिसंबर तक हर महीने वस्तुओं का व्यापार घाटा साल-दर-साल घटा है. चीन के साथ व्यापार घाटा 2025 में 32 प्रतिशत कम हुआ और वर्ष 2000 के बाद पहली बार चीन वह व्यापारिक साझेदार नहीं रहा, जिसके साथ अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापार घाटा है.
अमेरिका वापस आ गया है
निर्यात में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई. एग्रीमेंट ऑन रेसिप्रोकल ट्रेड (एआरटी) कार्यक्रम शुरू होने के बाद वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात 199.8 अरब डॉलर (6.2 प्रतिशत) बढ़कर रिकॉर्ड 3.4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया. 2025 में पूंजीगत वस्तुओं के निर्यात में 9.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई. एजेंडे में कहा गया है, “यह सिर्फ बयानबाजी नहीं है, आंकड़े कहानी बताते हैं. अमेरिका वापस आ गया है.” 2026 के लिए प्रशासन ने छह प्राथमिकताएं तय की हैं. एग्रीमेंट ऑन रेसिप्रोकल ट्रेड (एआरटी) कार्यक्रम जारी रखना, व्यापार कानूनों का प्रवर्तन, महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करना, अमेरिका–मेक्सिको–कनाडा समझौते की समीक्षा, चीन के साथ व्यापार प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिकी हितों को बढ़ावा देना.
गैर-टैरिफ बाधाएं कम करनी होंगी
एग्रीमेंट ऑन रेसिप्रोकल ट्रेड (एआरटी) कार्यक्रम के तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, मलेशिया और ताइवान के साथ समझौते किए हैं. भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ सहित अन्य साझेदारों के साथ ढांचा समझौतों की घोषणा की गई है. इन समझौतों के तहत साझेदार देशों को टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं कम करनी होंगी, जबकि अमेरिका “संशोधित टैरिफ” बनाए रखेगा.
औद्योगिक वस्तुओं पर लगभग सभी टैरिफ समाप्त कर रहे
एजेंडे में कहा गया है कि कई मामलों में व्यापारिक साझेदार अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर लगभग सभी टैरिफ समाप्त कर रहे हैं, जिनमें “भारत (औद्योगिक वस्तुओं पर 99 प्रतिशत)” और यूरोपीय संघ (औद्योगिक वस्तुओं पर 100 प्रतिशत) शामिल हैं. चीन के संबंध में दस्तावेज में कहा गया है कि दो दशकों से अधिक समय तक बिना रोकटोक मुक्त व्यापार की कीमत को लेकर कोई संदेह नहीं है. 2001 में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में चीन के शामिल होने के बाद अमेरिका ने लाखों नौकरियां खो दीं. हालांकि, अमेरिका चीन के साथ व्यापार जारी रखने की अपेक्षा करता है, लेकिन पारस्परिकता और संतुलन के आधार पर नई व्यवस्थाएं चाहता है. अक्टूबर 2025 में ट्रंप और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बुसान में हुआ समझौता इस दिशा में पहला कदम बताया गया है.
फिर से देश में स्थापित करने की भी बात कही गई
एजेंडा में महत्वपूर्ण क्षेत्रों को फिर से देश में स्थापित करने की भी बात कही गई है. रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का हवाला देते हुए कहा गया है कि अमेरिका अपने औद्योगिक आधार को युद्धकालीन स्थिति के अनुरूप ढालेगा और समान विचारधारा वाले साझेदारों के साथ महत्वपूर्ण खनिजों पर नया व्यापार समझौता करेगा. उत्तरी अमेरिका में प्रशासन 2026 में यूएसएमसीए की संयुक्त समीक्षा का नेतृत्व करेगा और चेतावनी दी है कि नवीनीकरण की सिफारिश तभी की जाएगी जब लंबित विवादों का समाधान हो सके. एजेंडे का नतीजा यह है कि हमारी मौजूदा इंटरनेशनल आर्थिक मुश्किल के लिए पॉलिसी बदलने और पहले जैसी स्थिति में लौटने की आदत को रोकने की जरूरत है. इसमें प्रेसिडेंट अब्राहम लिंकन की “नए सिरे से सोचने और नए सिरे से काम करने” की बात कही गई है.