Shyama Prasad Mukherjee: भारतीय जनसंघ के संस्थापक और राष्ट्रवादी विचारक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आज 125वीं जयंती मनाई जा रही है. इस मौके पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा. इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है.
पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने (Shyama Prasad Mukherjee) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आज, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर, मैं भारत के एक असाधारण राष्ट्र-निर्माता को नमन करता हूँ, जिनका जीवन विद्वता, साहस और राष्ट्र-सेवा के प्रति अटूट समर्पण से प्रेरित था. उन्होंने खुद को भारत की एकता, सम्मान और प्रगति के लिए समर्पित कर दिया.“
Today, on the 125th Jayanti of Dr. Syama Prasad Mookerjee, I bow to one of India’s most remarkable nation-builders, whose life was defined by scholarship, courage and an unwavering commitment to national service. He dedicated himself to the cause of India’s unity, dignity and…
— Narendra Modi (@narendramodi) July 6, 2026
Shyama Prasad Mukherjee के योगदान को किया याद
पीएम मोदी ने आगे लिखा, “डॉ. मुखर्जी का योगदान कई क्षेत्रों में रहा. वे एक बेहतरीन विचारक और शिक्षाविद थे, जिन्होंने इनोवेशन और भविष्य की ज़रूरतों के हिसाब से शिक्षा का समर्थन किया. उद्योग मंत्री के तौर पर, उन्होंने औद्योगिक आत्मनिर्भरता की नींव रखी और साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि पारंपरिक क्षेत्र और लोगों की आजीविका फलती-फूलती रहे. बंगाल के अकाल के दौरान उनके मानवीय प्रयासों से मुसीबत में फँसे लोगों के प्रति उनकी गहरी संवेदना झलकती थी. सबसे बड़ी बात यह है कि भारत की एकता और अखंडता के प्रति उनका अटूट समर्पण आज भी प्रेरणा का एक स्थायी स्रोत बना हुआ है. जैसे-जैसे हम ‘विकसित भारत’ की ओर अपनी यात्रा में आगे बढ़ रहे हैं, उनका विज़न हमारे रास्ते को रोशन करता रहेगा.“
अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ‘एक्स’ पर लिखा, “देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रखर पुरोधा, भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उनका स्मरण कर नमन करता हूं. डॉ. मुखर्जी ने ‘राष्ट्र प्रथम’ के आदर्श को अपने जीवन का ध्येय बनाया. बंगाल के विभाजन के समय उनका दूरदर्शी नेतृत्व और जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए उनका संघर्ष भारतीय इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा. सिद्धांतों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता और देश की अखंडता के लिए उनका आजीवन संघर्ष युवाओं को सदैव प्रेरणा देता रहेगा.”
अपना वीडियो संदेश भी शेयर किया
अमित शाह ने अपना वीडियो संदेश शेयर कर कहा, “श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस राष्ट्र के बहुत बड़े नेताओं में शुमार होते हैं. उन्होंने कभी जीवन में कुछ भी प्रसिद्धि के लिए नहीं किया, मगर जो भी किया उसके दूरगामी परिणाम देश के लिए शुभांकर हुए. आजादी के पहले जब विभाजन हो रहा था, तब पश्चिम बंगाल भारत में रहे, अंग्रेजों के साथ लड़ाई करके श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सुनिश्चित किया था और इसी के कारण आज पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न अंग बना.”
जेल में ही उनकी संदेहात्मक मृत्यु भी हुई
उन्होंने कहा, “देश जब आजाद हुआ, तो कश्मीर में धारा 370 लागू की गई। कश्मीर का अलग राष्ट्रध्वज और अलग संविधान होता था. कश्मीर में एक अलग प्रधानमंत्री होते थे. यह संकल्पना भारत की एकता और अखंडता के लिए बहुत खतरनाक थी. तब श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एक आंदोलन छेड़ा कि एक देश में ‘दो विधान, दो निशान और दो प्रधान’ नहीं रहेंगे. दिल्ली से लेकर कश्मीर तक वे मार्च लेकर गए. जहां कश्मीर की शुरुआत हुई, उनसे परमिट मांगा गया. उन्होंने कहा कि ‘कश्मीर मेरे देश का हिस्सा है. मुझे किसी परमिट की जरूरत नहीं है.’ वहीं श्यामा प्रसाद मुखर्जी को गिरफ्तार कर लिया गया. जेल में ही उनकी संदेहात्मक मृत्यु भी हुई.”
श्यामा प्रसाद मुखर्जी का स्वप्न साकार हो चुका है
अमित शाह ने आगे कहा, “आज श्यामा प्रसाद मुखर्जी का स्वप्न साकार हो चुका है. धारा 370 समाप्त हो चुकी है और उनकी बनाई हुई पार्टी भारतीय जनसंघ, जो अब भारतीय जनता पार्टी के नाम से जानी जाती है, गंगोत्री से लेकर बंगाल के गंगासागर तक भाजपा का राज है. लाखों-करोड़ों कार्यकर्ताओं ने 60 साल के अंदर इनकी विचारधारा पर आगे बढ़ते हुए आज देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास किया है. आज मैं हृदय से श्याम प्रसाद मुखर्जी के महान व्यक्तित्व को प्रणाम करके विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.”