ED का बड़ा एक्शन: I-PAC के 3 ठिकानों पर छापे; Mamata Banerjee पर मंडराया संकट?

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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ED Raids I-PAC Offices: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का सियासी माहौल अपने चरम पर है और हर राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरा हुआ है. लेकिन इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के सामने एक ऐसा बड़ा संकट खड़ा हो गया है, जिसने पूरे राजनीतिक समीकरण को हिला कर रख दिया है.  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल के चर्चित कोयला तस्करी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनावी रणनीतिक संचालन से जुड़ी संस्था I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है. इस कार्रवाई ने चुनाव से ठीक पहले ममता बनर्जी के पूरे कैंप में हलचल पैदा कर दी है और इसे सीधे तौर पर चुनावी रणनीति पर असर डालने वाला कदम माना जा रहा है.

दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद में एक साथ रेड

ED की यह कार्रवाई बेहद योजनाबद्ध और गुप्त तरीके से अंजाम दी गई. जांच एजेंसी की टीमों ने एक साथ देश के तीन प्रमुख शहरों—दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद—में I-PAC के दफ्तरों पर छापे मारे. इस समन्वित कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि जांच एजेंसी इस मामले को गंभीरता से ले रही है और इससे जुड़े हर संभावित लिंक को खंगालने में जुटी है. बेंगलुरु में I-PAC के एक डायरेक्टर ऋषि राज सिंह (ऋषिकांत सिंह) के आवास पर भी घंटों तक तलाशी अभियान चलाया गया, जहां से कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिलने की आशंका जताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन का मकसद कोयला घोटाले से जुड़े पैसों की कथित मनी लॉन्ड्रिंग और चुनावी फंडिंग के बीच किसी भी संभावित कनेक्शन को खोजना है.

जनवरी की घटना ने बढ़ाई थी संवेदनशीलता

इस कार्रवाई की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इससे पहले जनवरी 2026 में जब ED ने कोलकाता स्थित I-PAC कार्यालय पर छापा मारा था, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंच गई थीं. उन्होंने न केवल इस कार्रवाई का खुलकर विरोध किया था, बल्कि कथित तौर पर ED अधिकारियों से एक फाइल भी छीन ली थी. यह घटना उस समय राज्य की राजनीति में बड़े विवाद का कारण बनी थी और इसे सत्ता और जांच एजेंसियों के बीच सीधे टकराव के रूप में देखा गया था. इस घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि I-PAC का मामला ममता बनर्जी के लिए कितना संवेदनशील और राजनीतिक रूप से अहम है.

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला, बढ़ी सख्ती

कोलकाता की उसी घटना के बाद यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया. 31 मार्च 2026 को Supreme Court of India में इस मुद्दे पर सुनवाई हुई, जिसमें ED ने आरोप लगाया कि छापेमारी के दौरान जांच में बाधा डाली गई थी. अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार के रवैये पर सवाल उठाए और ED की याचिका को लेकर गंभीर रुख दिखाया. अदालत की इस सख्ती के तुरंत बाद तीन अलग-अलग शहरों में I-PAC पर छापेमारी को एक बड़े और रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिसने पूरे राजनीतिक माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है.

क्या है I-PAC और क्यों है अहम

I-PAC खुद में एक बेहद प्रभावशाली और चर्चित चुनावी रणनीतिक संस्था है, जिसकी स्थापना Prashant Kishor ने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले की थी. यह संस्था पर्दे के पीछे रहकर राजनीतिक दलों के लिए डेटा एनालिसिस, कैंपेन मैनेजमेंट और चुनावी रणनीति तैयार करती है. हालांकि प्रशांत किशोर 2021 में इससे अलग हो चुके हैं, लेकिन I-PAC की भूमिका आज भी कई बड़े चुनावों में अहम बनी हुई है. वर्तमान में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के चुनावी अभियान को संभालने में I-PAC की प्रमुख भूमिका मानी जाती है, जिसे इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन देख रहे हैं.

चुनाव से पहले सियासी असर के संकेत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले I-PAC जैसे संगठन पर ED की कार्रवाई का सीधा असर तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति और मैदानी अभियान पर पड़ सकता है. यह न केवल संगठनात्मक स्तर पर दबाव बढ़ाएगा, बल्कि विपक्ष को भी हमला करने का बड़ा मुद्दा देगा. साथ ही, यह मामला चुनावी बहस का केंद्र बन सकता है और आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को और अधिक गरमा सकता है.

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