दिवाली पर कंपनी ने नहीं दिया बोनस तो फंस सकते हैं बॉस! जानें कर्मचारियों के लिए क्या कहता है कानून

Divya Rai
Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Diwali Bonus Rules: दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही लोग घर की सजावट, कपड़ों, मिठाइयों और दूसरे जरूरी सामान की खरीदारी की तैयारी करने लगते हैं. इस दौरान नौकरीपेशा लोगों को अपनी सैलरी के साथ कंपनी से मिलने वाले बोनस का भी इंतजार रहता है. कई संस्थान कर्मचारियों को त्योहार के मौके पर मिठाई, गिफ्ट या अतिरिक्त रकम देते हैं. हालांकि, हर कंपनी में दिवाली पर अलग से बोनस देने का नियम एक जैसा नहीं है.

कर्मचारियों के लिए यह जानना जरूरी है कि कुछ परिस्थितियों में बोनस देना कानूनी जिम्मेदारी हो सकती है. अगर कोई कंपनी पात्र कर्मचारी को नियमों के मुताबिक मिलने वाला बोनस नहीं देती है, तो उसके खिलाफ शिकायत की जा सकती है. ऐसे में सवाल उठता है कि बोनस से जुड़े नियम क्या हैं, किन कर्मचारियों को इसका लाभ मिलता है और भुगतान नहीं होने पर क्या कदम उठाए जा सकते हैं.

बोनस को लेकर क्या है कानूनी व्यवस्था?

भारत में कर्मचारियों को बोनस (Diwali Bonus Rules) देने के नियम पहले पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट, 1965 के तहत निर्धारित किए गए थे. इस कानून में पात्र कर्मचारियों को तय शर्तों के आधार पर बोनस देने का प्रावधान था. 21 नवंबर 2025 से लागू किए गए नए श्रम कानूनों के तहत बोनस से संबंधित प्रावधान अब कोड ऑन वेजेज, 2019 की व्यवस्था में शामिल हैं. इसलिए किसी कर्मचारी को बोनस मिलेगा या नहीं, यह तय करने के लिए लागू कानून, निर्धारित वेतन सीमा और अन्य शर्तों को देखना जरूरी है. ध्यान देने वाली बात यह है कि कानूनी बोनस और दिवाली के मौके पर कंपनी की ओर से अपनी इच्छा से दिए जाने वाले अतिरिक्त पैसे अलग-अलग हो सकते हैं. इसलिए हर कर्मचारी को दिवाली पर अलग से बोनस मिलना अनिवार्य नहीं है.

किन कर्मचारियों को बोनस पाने का अधिकार है? Diwali Bonus Rules

कंपनी में काम करने वाले सभी कर्मचारियों को एक समान शर्तों पर बोनस नहीं मिलता. इसके लिए कर्मचारी की पात्रता, वेतन, संस्थान पर लागू नियम और निर्धारित अवधि तक काम करने जैसी शर्तें महत्वपूर्ण होती हैं. पहले पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट के तहत पात्र कर्मचारियों को न्यूनतम 8.33 प्रतिशत बोनस देने का प्रावधान था, जबकि अधिकतम बोनस की सीमा 20 प्रतिशत थी. नई श्रम संहिता के तहत किसी कर्मचारी की पात्रता और बोनस की गणना लागू प्रावधानों के अनुसार की जाती है. इसलिए केवल कंपनी में नौकरी करने के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर कर्मचारी को एक निश्चित रकम बोनस के रूप में जरूर मिलेगी. कर्मचारी को अपनी वेतन सीमा और संस्थान पर लागू नियमों की जानकारी लेनी चाहिए.

बोनस नहीं दिया तो क्या कंपनी पर हो सकती है कार्रवाई?

अगर कोई नियोक्ता कानून के तहत पात्र कर्मचारी को निर्धारित बोनस का भुगतान नहीं करता है, तो कर्मचारी संबंधित श्रम विभाग या सक्षम अधिकारी के पास शिकायत कर सकता है. शिकायत की जांच और मामले के तथ्यों के आधार पर कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि, बोनस नहीं देने पर बॉस को सीधे जेल हो जाएगी, ऐसा कहना सही नहीं है. कानूनी कार्रवाई इस बात पर निर्भर करती है कि किस नियम का उल्लंघन हुआ है, मामला किस तरह का है और संबंधित कानून में क्या दंड निर्धारित है. हर मामले में जेल की सजा होना जरूरी नहीं है.

कंपनी बोनस देने से मना करे तो कर्मचारी क्या करें?

अगर आपको लगता है कि कंपनी ने पात्र होने के बावजूद आपका बोनस रोक लिया है, तो सबसे पहले अपने रोजगार से जुड़े दस्तावेज और कंपनी की बोनस नीति की जांच करें. इसके बाद ये कदम उठाए जा सकते हैं.

  • HR से जानकारी लें: कंपनी के मानव संसाधन विभाग से लिखित में पूछें कि बोनस क्यों नहीं दिया गया.
  • दस्तावेज संभालकर रखें: वेतन की पर्चियां, नियुक्ति पत्र, बोनस से जुड़े ईमेल और कंपनी की नीतियों की प्रतियां सुरक्षित रखें.
  • श्रम विभाग से संपर्क करें: कंपनी से समाधान नहीं मिलने पर संबंधित श्रम अधिकारी या श्रम विभाग में शिकायत करने के विकल्प पर विचार करें.
  • कानूनी सलाह लें: यदि मामला लंबित है या कंपनी भुगतान करने से इनकार कर रही है, तो श्रम कानून के जानकार से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है.

दिवाली बोनस और सालाना बोनस में समझें अंतर

कई कंपनियां दिवाली के मौके पर कर्मचारियों को अतिरिक्त रकम, गिफ्ट या मिठाई देती हैं. यह कंपनी की नीति, रोजगार समझौते या अन्य लागू शर्तों पर निर्भर कर सकता है. दूसरी ओर, कानून के तहत देय सालाना बोनस पात्र कर्मचारियों के लिए निर्धारित नियमों से जुड़ा होता है. इसलिए यदि किसी कंपनी ने दिवाली पर अतिरिक्त बोनस नहीं दिया है, तो इसका अर्थ अपने आप यह नहीं है कि उसने कानून तोड़ा है. लेकिन अगर कर्मचारी को कानूनी रूप से देय बोनस नहीं मिलता, तो वह अपने अधिकारों के लिए उचित माध्यम से शिकायत कर सकता है.

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