मुर्दों से काम करवाएगा जोधपुर प्रशासन! क्या ‘स्वर्ग’ से करेंगे जनगणना? लिस्ट में नाम देख चौंके लोग

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Jodhpur Census 2026: जोधपुर में जनगणना 2026 को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल दी है. जिस काम में सटीक डेटा और जिम्मेदारी सबसे ज्यादा जरूरी होती है, उसी जनगणना की ड्यूटी लिस्ट में मृत और रिटायर लोगों के नाम शामिल कर दिए गए हैं. इस चूक के बाद नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और आम लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.

जिला प्रशासन ने जनगणना की जिम्मेदारी जोधपुर नगर निगम (Jodhpur Municipal Corporation) को सौंपी थी. इसके तहत निगम कमिश्नर सिद्धार्थ पालानीचामी और कार्यालय प्रमुख जनगणना अधिकारी की ओर से 2084 लोगों की ड्यूटी लिस्ट जारी की गई. लेकिन यह सूची सामने आते ही साफ हो गया कि इसे बिना किसी जांच, अपडेट और वेरिफिकेशन के तैयार किया गया है.

2084 नामों की सूची में सामने आई बड़ी लापरवाही

जारी की गई सूची को देखने के बाद यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि पुराने रिकॉर्ड को ही बिना जांच के दोबारा इस्तेमाल कर लिया गया. कई नाम ऐसे हैं, जो या तो सेवा में नहीं हैं या जिनका काफी पहले निधन हो चुका है.

जनगणना जैसे संवेदनशील कार्य में इस तरह की लापरवाही को गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि इसमें सटीक और अपडेटेड जानकारी बेहद जरूरी होती है.

मृत व्यक्ति को सौंपी गई जनगणना ड्यूटी

लाला लाजपत राय कॉलोनी से सामने आया मामला इस लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण है. यहां रहने वाली नसीम बानो ने बताया कि उनके पति अब्दुल वाहिद जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी (Jai Narain Vyas University) में UDC के पद पर कार्यरत थे. 10 मई 2024 को उनका निधन हो गया था.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 15 मई 2024 को जोधपुर नगर निगम ने ही उनका मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया था. इसके बावजूद उसी व्यक्ति का नाम जनगणना ड्यूटी लिस्ट में शामिल कर दिया गया. नसीम बानो ने इस घोर लापरवाही पर भारी आक्रोश जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.

हाल ही में मृत व्यक्ति का नाम भी शामिल

रामापीर कॉलोनी के दीपक अवस्थी का मामला भी इसी तरह की लापरवाही को उजागर करता है. वे जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी (Jai Narain Vyas University) में UDC रह चुके थे. 13 फरवरी 2026 को उनका निधन हुआ था और 14 फरवरी को कागा स्वर्ग आश्रम में उनका अंतिम संस्कार किया गया था. इसके बावजूद प्रशासन ने बिना किसी सत्यापन के उनका नाम भी इस ड्यूटी लिस्ट में शामिल कर दिया.

रिटायर्ड कर्मचारियों के नाम भी जोड़े

इस लिस्ट में कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों के नाम भी शामिल हैं. अगस्त 2024 में रिटायर हुए अशोक व्यास ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैं नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों से पूछना चाहूंगा कि किस अधिकार से उन्होंने मेरी ड्यूटी लगाई? यह लिस्ट देखकर ऐसा लगता है कि उन्होंने आंखें बंद कर बस नाम थोप दिए हैं. उन्होंने यह भी बताया कि उनके साथ रिटायर हुए वीरम राम और मुना राम के नाम भी इसी सूची में शामिल किए गए हैं.

लापरवाही पर बढ़ा आक्रोश

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद लोगों में भारी नाराजगी है. प्रभावित परिवारों और पूर्व कर्मचारियों का कहना है कि इस तरह की गलती न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है.

अब मांग की जा रही है कि इस पूरे मामले की जांच करवाई जाए और जिन अधिकारियों की लापरवाही सामने आए, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.

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