अब राशन की दुकानों पर फिर मिलेगा मिट्टी का तेल, जानें केंद्र सरकार ने किन-किन राज्यों को दो मंजूरी..?

New Delhi: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर रसोई गैस (LPG) की सप्लाई में आ रही दिक्कतों के बीच केंद्र सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. अब राशन की दुकानों और चुनिंदा पेट्रोल पंपों से केरोसीन यानी मिट्टी का तेल मिल सकेगा. 30 मार्च को हुए इस ऐलान का मकसद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट के दौरान घरेलू जरूरतों को पूरा करना है.

यह योजना अगले 60 दिनों के लिए लागू

यह योजना फिलहाल 29 मार्च से शुरू होकर अगले 60 दिनों के लिए लागू की गई है. केंद्र ने इस पूरी व्यवस्था के लिए राज्यों को उनके नियमित कोटे से अलग 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त तेल भी जारी कर दिया है. सरकार ने देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस व्यवस्था को दोबारा बहाल करने की मंजूरी दी है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे प्रमुख राज्यों के साथ-साथ पहाड़ी प्रदेशों जैसे उत्तराखंड और हिमाचल में भी यह सुविधा मिलेगी.

सभी केंद्र शासित प्रदेश इस सूची में शामिल

दक्षिण भारत के तेलंगाना और आंध्र प्रदेश सहित पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों और लगभग सभी केंद्र शासित प्रदेशों को इस सूची में शामिल किया गया है. इस दौरान लोग अपने नजदीकी राशन डिपो से उचित सरकारी रेट पर तेल ले सकेंगे. राशन की दुकानों के अलावा प्रशासन हर जिले में दो ऐसे पेट्रोल पंप भी तय करेगा, जहाँ से केरोसीन खरीदा जा सकेगा, हालांकि इन पंपों के लिए 5000 लीटर स्टॉक की अधिकतम सीमा तय की गई है.

इस्तेमाल को लेकर सख्त हिदायत

हर परिवार को कितना तेल मिलेगा, इसका फैसला राज्य सरकारें अपने पास मौजूद स्टॉक और स्थानीय मांग को ध्यान में रखकर करेंगी. हालांकि, सरकार ने इसके इस्तेमाल को लेकर सख्त हिदायत दी है. इस केरोसीन का उपयोग केवल घर में खाना पकाने या रोशनी (लालटेन आदि) के लिए ही किया जा सकेगा. इसे किसी भी तरह के कमर्शियल काम या फैक्ट्री जैसे औद्योगिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी.

कई राज्यों में बंद कर दी गई थी केरोसीन की सप्लाई

पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भले ही वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हों, लेकिन सरकार देश में ऊर्जा की कमी नहीं होने देगी. पहले सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत केरोसीन की सप्लाई कई राज्यों में बंद कर दी गई थी, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इसे अस्थाई तौर पर फिर से शुरू किया गया है ताकि आम आदमी की रसोई पर कोई आंच न आए.

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