करवा चौथ पर क्यों पढ़नी चाहिए लपसी तपसी की कहानी? जानिए क्या है इसकी वजह

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Lapsi Tapsi Ki Kahani करवा चौथ और संकष्टी चतुर्थी व्रत में लपसी-तपसी की कहानी जरूर सुननी चाहिए. माना जाता है कि प्रत्येक व्रत में इस कहानी को पढ़ने या सुनने से खूब पुण्य मिलता है. धार्मिकों के अनुसार लपसी-तपसी नाम के दो भाई थे. इनमें से जिसका नाम तपसी था वह हमेशा तपस्या में लीन रहता था, वही दूसरा भाई लपसी भगवान को लापसी का भोग लगाकर स्वयं खा लेता था. ऐसे में दोनों भाइयों ने नारद से पूछा कि कौन बड़ा भक्त है. चलिए जानते हैं नारद जी ने कैसे दोनों की परीक्षा ली.

लपसी और तपसी की कहानी

एक दिन दोनों भाइयों में अचानक झगड़ा हो गया. तपसी का कहना था कि वह बड़ा है और लपसी का कहना है कि वह बड़ा है. दोनों लड़ ही रहे थे कि वहां नारदमुनि पहुंच गए. दोनों को झगड़ते देख नारद जी ने कहा कि आप दोनों क्यों लड़ रहे हो? तो लपसी ने कहा मैं बड़ा हूं और तपसी ने कहा मैं बड़ा हूं. इस दौरान तपसी बोला मैं सारे दिन भगवान की पूजा करता हूं. उनकी यह बातें सुनकर नारद जी ने कहा मैं तुम्हारा फैसला कल कर दूंगा.

ऐसे में दूसरे दिन लपसी और तपसी जब दोनों नहा कर अपनी रोज की भक्ति करने आये तो नारद जी ने छुप करके सवा करोड़ की एक एक अंगूठी उन दोनों के आगे रख दी. जैसे ही तपसी ने अंगूठी देखी उसने अपने घुटने के नीचे छिपा ली और सोचने लगा कि अब मुझे इससे खूब धन मिलेगा. इससे मैं यज्ञ करूंगा और अपने आप ही बड़ा हो जाऊंगा. वही जब लपसी ने यह अंगूठी देखी तो उसने सोचा कि अगर मैं इसे अपने पास रखूंगा तो कोई भी आकर मेरी गर्दन काट देगा. ऐसा सोचकर लपसी ने वो अंगूठी फेंक दी.

इसके बाद नारद जी ने तपसी से पूछा कि तेरे घुटने के नीचे क्या है? ऐसे में जब तपसी ने अपना घुटना उठाया तो वहां अंगूठी निकली. इस दौरान नारदमुनि ने तपसी से कहा कि तपस्या करने के बाद भी तुम्हारी चोरी करने की आदत नहीं गयी इसलिए लपसी बड़ा है और ये भी कहा कि अब तुम्‍हें तुम्हारी तपस्या का भी कोई फल नहीं मिलेगा. उनकी इस बात पर तपसी शर्मिंदा होकर माफी मांगने लगा. तभी तपसी ने नारद देव जी से पूछा मेरी ये आदत कैसे छुटगी. ऐसे में नारद जी ने कहा कि कार्तिक महीने में जो स्त्रियां कार्तिक व्रत रखेंगी. अगर वे तुझे अपना पुण्य देंगी तब ही यह पाप उतरेगा.

तब नारद जी ने कहा कि..

  • उन्‍होंने कहा कि यदि कोई गाय और कुत्ते की रोटी नहीं बनायेगा तो फल तुझे मिलेगा.
  • यदि कोई दिये से दिया जलाएगा तो फल तुझे मिलेगा.
  • यदि कोई ब्राह्मण को जिमा कर दक्षिणा नही देगा तो फल तुझे मिलेगा.
  • यदि कोई साड़ी के साथ ब्लाउज नहीं देगा तो फल तुझे मिलेगा.
  • यदि कोई सारी कहानी सुने लेकिन तुम्हारी कहानी नहीं सुने तो फल तुझे मिलेगा.

इसके साथ ही उसी दिन से हर व्रत कथा कहानी के साथ लपसी तपसी की कहानी भी सुनी और कही जाती है.

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