Middle East Crisis India: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मंगलवार को फोन पर अहम बातचीत हुई. दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया. 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद यह दोनों नेताओं की पहली बातचीत है.
पीएम मोदी ने दिया शांति का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति से बातचीत हुई और दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति पर विचार साझा किए.
पीएम मोदी ने कहा कि भारत तनाव कम करने और जल्द शांति बहाल करने का समर्थन करता है. उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला और सुरक्षित बनाए रखने की अहमियत पर भी जोर दिया. साथ ही दोनों देशों ने शांति और स्थिरता के प्रयासों को लेकर संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खास चर्चा
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी पुष्टि की कि दोनों नेताओं के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चर्चा हुई. इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा था कि ईरान को इस समुद्री मार्ग को खोलने के लिए दी गई समयसीमा बढ़ा दी गई है. साथ ही ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित हमले को पांच दिन के लिए टाल दिया गया है.
जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री की बातचीत
इससे पहले 23 मार्च को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की थी. इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर चर्चा की.
जयशंकर ने बताया कि ऊर्जा सुरक्षा इस बातचीत का मुख्य विषय रहा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया.
खाड़ी देशों के साथ भी संवाद
एस. जयशंकर ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों सऊदी अरब, यूएई, ओमान, कतर, बहरीन और कुवैत के राजदूतों से भी मुलाकात की. इस दौरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई. साथ ही भारतीय समुदाय को दिए जा रहे सहयोग के लिए इन देशों का आभार भी जताया गया.
तेल-गैस की कीमतों पर असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजार पर साफ नजर आ रहा है. तेल और गैस की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा आती है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है.