RSS Chief Mohan Bhagwat: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि दुनिया को संघर्ष की नहीं, बल्कि सद्भाव की जरूरत है. मोहन भागवत ने ईरान-अमेरिका जंग पर दुनिया को शांति का संदेश दिया है. नागपुर में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि युद्ध केवल भारत ही खत्म कर सकता है. उन्होंने कहा कि दुनिया के चिंतकों के ध्यान में बार-बार देशों से आवाज़ उठ रही है कि चल रहे युद्ध को खत्म भारत ही कर सकता है क्योंकि विकासशील भारत की प्रवृत्ति का ज्ञान है.
संघर्षों की जड़ स्वार्थ एवं वर्चस्व की चाह
महाराष्ट्र के नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि दुनिया में संघर्षों की जड़ स्वार्थ एवं वर्चस्व की चाह है और स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही प्राप्त की जा सकती है. मोहन भागवत ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया 2,000 वर्षों से संघर्षों के समाधान के लिए विभिन्न विचारों के साथ प्रयोग करती रही है लेकिन उसे खास सफलता नहीं मिली. उन्होंने कहा कि धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्म परिवर्तन और श्रेष्ठता एवं हीनता के विचार अब भी मौजूद हैं.
सहयोग की ओर बढ़ने का आह्वान
RSS प्रमुख भागवत ने नागपुर में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यालय की आधारशिला रखने के बाद इस सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान सिखाता है कि सभी जुड़े हुए हैं और एक हैं. उन्होंने संघर्ष से सौहार्द और सहयोग की ओर बढ़ने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान भी धीरे-धीरे इसी समझ की ओर बढ़ रहा है.
शांति केवल धर्म के पालन से ही हासिल
RSS प्रमुख ने कहा कि दुनिया में संघर्षों की जड़ स्वार्थ एवं वर्चस्व की चाह है और स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही हासिल की जा सकती है. मोहन भागवत ने आचरण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि धर्म केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं रह सकता बल्कि यह लोगों के व्यवहार में भी दिखना चाहिए.
अनुशासन के लिए निरंतर अभ्यास की जरूरत
उन्होंने कहा कि अनुशासन और नैतिक मूल्यों के पालन के लिए निरंतर अभ्यास की जरूरत होती है और इसमें अक्सर व्यक्तिगत कठिनाई भी झेलनी पड़ती हैं. भागवत ने कहा कि भारत मानवता में विश्वास करता है जबकि अन्य देश अस्तित्व के लिए संघर्ष और ताकतवर के टिके रहने के सिद्धांत को मानते हैं. उन्होंने कहा कि दुनिया को संघर्ष नहीं, बल्कि सौहार्द की जरूरत है.
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