Monsoon Alert: देशभर में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, लेकिन इस बार इसकी दस्तक कई राज्यों के लिए राहत से ज्यादा मुश्किलें लेकर आई है. पूर्वोत्तर भारत से लेकर पहाड़ी और मैदानी इलाकों तक लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जबकि बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने हजारों लोगों की परेशानी बढ़ा दी है.
कई जगह सड़कें पानी में डूब गई हैं, पुलों को नुकसान पहुंचा है और सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी साफ संकेत दिए हैं कि फिलहाल मौसम से राहत मिलने की उम्मीद कम है. विभाग ने देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज आंधी और बाढ़ जैसी स्थिति को लेकर चेतावनी जारी की है. ऐसे में आने वाले 24 घंटे कई राज्यों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं.
पूर्वोत्तर में सबसे ज्यादा तबाही, बाढ़ और भूस्खलन से बिगड़े हालात
मानसून का सबसे ज्यादा असर इस समय पूर्वोत्तर भारत में देखने को मिल रहा है. असम और अरुणाचल प्रदेश लगातार हो रही भारी बारिश के कारण सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल हैं. कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों में घुस चुका है. कई गांवों और कस्बों का संपर्क टूट गया है, जिससे लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं भी बढ़ी हैं, जिससे सड़कें बंद हो गई हैं और कई इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाने में भी मुश्किलें आ रही हैं. प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य जारी है.
असम में रेलवे पुल क्षतिग्रस्त, कई रेल सेवाएं प्रभावित
असम के धेमाजी जिले में तेज बहाव और नदी के कटाव के कारण एक महत्वपूर्ण रेलवे पुल क्षतिग्रस्त हो गया है. पुल को नुकसान पहुंचने के बाद पूर्वोत्तर क्षेत्र की कई अहम रेल सेवाएं प्रभावित हुई हैं और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. रेलवे की ओर से मरम्मत का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है ताकि जल्द से जल्द ट्रेनों का संचालन सामान्य किया जा सके. वहीं असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार राज्य के कई जिलों में बाढ़ का पानी आबादी वाले इलाकों तक पहुंच चुका है. प्रशासन लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने में जुटा हुआ है.
अरुणाचल प्रदेश में सड़क संपर्क टूटा, राहत अभियान जारी
अरुणाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने हालात और गंभीर बना दिए हैं. कई जिलों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ के कारण मुख्य सड़कें मलबे से भर गई हैं. कई स्थानों पर सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है.
ऐसे इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए प्रशासन को भी अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित शिविरों तक पहुंचाया जा रहा है.
तटीय कर्नाटक में रेड अलर्ट, अत्यधिक बारिश की चेतावनी
देश के पश्चिमी तटीय इलाकों में भी मानसून का असर लगातार बढ़ रहा है. भारतीय मौसम विभाग ने तटीय कर्नाटक के कई जिलों के लिए 2 और 3 जुलाई को रेड अलर्ट जारी किया है. विभाग के अनुसार इन इलाकों में 204.5 मिलीमीटर से अधिक अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है.
लगातार बारिश के कारण नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनने का खतरा बना हुआ है. प्रशासन ने स्थानीय लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है.
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में फ्लैश फ्लड का खतरा
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अधिकांश हिस्सों में भी दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय हो चुका है. पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है. प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है. लोगों से कहा गया है कि वे नदियों, पहाड़ी नालों और प्राकृतिक जलधाराओं के पास जाने से बचें, क्योंकि अचानक जलस्तर बढ़ने की स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है. प्रशासन संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी कर रहा है.
19 राज्यों में भारी बारिश और 80 किलोमीटर प्रति घंटे की आंधी का अलर्ट
मैदानी राज्यों में भी मौसम तेजी से बदल रहा है. मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार समेत देश के करीब 19 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. इसके साथ ही कई इलाकों में 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की संभावना जताई गई है. तेज हवाओं के कारण पेड़ों के गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है. लोगों से खराब मौसम के दौरान घरों में रहने और आवश्यक होने पर ही बाहर निकलने की अपील की गई है.
किसानों और आम लोगों के लिए जारी की गई सलाह
बदलते मौसम को देखते हुए प्रशासन ने किसानों और आम नागरिकों के लिए भी जरूरी सलाह जारी की है. किसानों से कहा गया है कि खराब मौसम के दौरान खुले खेतों में काम करने या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें. वहीं लोगों को निचले इलाकों, तेज बहाव वाली नदियों और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी गई है. बिजली गिरने और तेज हवाओं की आशंका को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके.
हिमाचल प्रदेश में भी मौसम पर कड़ी नजर
हिमाचल प्रदेश के मंडी सहित कई पहाड़ी क्षेत्रों में भी लगातार बादल छाए हुए हैं और बारिश का दौर जारी है. फिलहाल ब्यास नदी सामान्य स्तर पर बह रही है, लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि यदि बारिश की तीव्रता बढ़ती है तो नदी के जलस्तर में भी तेजी से वृद्धि हो सकती है.
प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी है और आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं. मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे पूरे उत्तर भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं और कई इलाकों में मौसम का असर और अधिक बढ़ सकता है.
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