Middle East Crisis: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार सक्रिय हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ अहम बैठक करेंगे. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के संभावित प्रभावों को लेकर राज्यों की तैयारियों और रणनीतियों की समीक्षा करना है.
राज्यों को दी जाएगी अहम जानकारी
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह बैठक केवल समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रधानमंत्री मुख्यमंत्रियों को मौजूदा भू-राजनीतिक हालात, वैश्विक प्रभाव और भारत के दृष्टिकोण के बारे में विस्तार से जानकारी भी देंगे.
बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण ऊर्जा, आपूर्ति शृंखला, उर्वरक और व्यापार जैसे क्षेत्रों पर असर पड़ने की आशंका है. ऐसे में केंद्र सरकार राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाकर किसी भी संभावित संकट से निपटने की तैयारी कर रही है.
चुनावी राज्यों के CM बैठक में नहीं होंगे शामिल
अधिकारियों के मुताबिक, जिन राज्यों में चुनाव चल रहे हैं, उनके मुख्यमंत्री इस बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे. इसका कारण आदर्श आचार संहिता लागू होना है.
हालांकि, इन राज्यों के प्रशासनिक स्तर पर समन्वय बनाए रखने के लिए कैबिनेट सचिवालय के माध्यम से मुख्य सचिवों के साथ अलग बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि किसी भी स्थिति में तैयारी कमजोर न पड़े.
संसद में भी उठ चुका है मुद्दा
इससे पहले बुधवार को नई दिल्ली में संसद भवन परिसर में पश्चिम एशिया की स्थिति पर एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई थी. इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने की.
इस महत्वपूर्ण बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, राजीव रंजन (ललन) सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए.
विपक्ष ने भी दिया समर्थन
बैठक के बाद Kiren Rijiju ने जानकारी दी कि सरकार ने विपक्षी दलों के सभी सवालों और चिंताओं का जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने भी इस संवेदनशील स्थिति से निपटने के लिए सरकार के प्रयासों का समर्थन करने का आश्वासन दिया है. बैठक में कांग्रेस, वाम दल और समाजवादी पार्टी समेत कई दलों के नेता मौजूद रहे.
सात सशक्त समूहों का गठन
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने संसद में अपने संबोधन के दौरान बताया था कि सरकार ने इस संकट के प्रभाव को कम करने के लिए सात सशक्त समूहों का गठन किया है.
ये समूह ईंधन, आपूर्ति शृंखला, उर्वरक, लॉजिस्टिक्स और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर काम कर रहे हैं, ताकि देश की अर्थव्यवस्था और आवश्यक सेवाओं पर किसी तरह का नकारात्मक असर न पड़े.
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर भी फोकस
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर भी पड़ रहा है, जिससे व्यापार और तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.
इसके अलावा खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार सतर्क है. इस बैठक के जरिए केंद्र और राज्य मिलकर हर संभावित स्थिति से निपटने के लिए रणनीति तैयार करेंगे.

