Bank Cheque Clear: बैंकिंग सेवाओं को तेज और सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार बदलाव कर रहा है. इसी दिशा में चेक क्लियरिंग प्रक्रिया को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है, जिससे अब बैंक ग्राहकों को पहले की तुलना में काफी राहत मिलने वाली है. पहले जहां चेक क्लियर होने में कई दिन लग जाते थे, वहीं अब नई व्यवस्था के तहत यह प्रक्रिया काफी तेज हो गई है.
RBI के नए नियमों के बाद देशभर के बैंकों में चेक क्लियरिंग प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है. इसके बाद ग्राहकों को लंबा इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. HDFC और ICICI समेत कई प्रमुख बैंकों ने इस व्यवस्था को अपनाना शुरू कर दिया है, जिससे चेक क्लियरिंग पहले की तुलना में अधिक तेज और सुरक्षित बन गई है.
नई व्यवस्था के तहत चेक क्लियरिंग प्रक्रिया को दो मुख्य चरणों में बांटा गया है. पहले चरण में ग्राहकों द्वारा जमा किए गए चेक को बैंक सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच स्कैन करके क्लियरिंग हाउस भेजते हैं. इसके बाद जिस बैंक से भुगतान होना है, उसे शाम 7 बजे तक अपनी पुष्टि देनी होती है. इस प्रक्रिया में हर चेक के लिए ‘आइटम एक्सपायरी टाइम’ भी निर्धारित किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी को रोका जा सके. इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलेगा और चेक भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी.
जानें कैसे काम करता है पॉजिटिव पे सिस्टम?
RBI ने चेक भुगतान प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाने के लिए पॉजिटिव पे सिस्टम को भी बढ़ावा दिया है. इस सिस्टम के तहत बड़ी राशि वाले चेक की अतिरिक्त जांच की जाती है ताकि धोखाधड़ी की संभावना कम की जा सके. 50 हजार रुपये से अधिक के चेक के लिए खाताधारक को पहले से बैंक को चेक की जानकारी या फोटो उपलब्ध करानी पड़ सकती है. इसके बाद बैंक चेक पर लिखी गई जानकारी और पहले से जमा की गई जानकारी का मिलान करता है. यदि सभी जानकारी सही पाई जाती है, तो भुगतान प्रक्रिया आसानी से पूरी हो जाती है.
बैंक ने ग्राहकों के लिए जारी किए जरूरी निर्देश
बैंकों ने ग्राहकों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह भी दी है. चेक जारी करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपके खाते में पर्याप्त बैलेंस मौजूद हो. इसके अलावा चेक पर नाम, राशि, तारीख और हस्ताक्षर जैसी सभी जानकारी साफ और सही तरीके से भरें. अगर चेक में किसी प्रकार की गलती होती है, तो तकनीकी कारणों से उसे रिजेक्ट किया जा सकता है, जिससे भुगतान में देरी हो सकती है.
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