भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह 697 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है. गोल्ड रिजर्व और फॉरेन करेंसी एसेट्स में सुधार से यह उछाल आया है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति मजबूत दिख रही है.
मार्च में गोल्ड ETF में निवेश में भारी गिरावट दर्ज की गई है और इनफ्लो घटकर ₹2,266 करोड़ रह गया. सोने की कीमतों में गिरावट और वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशकों की रुचि कम हुई, हालांकि AUM अभी भी मजबूत बना हुआ है.
शुक्रवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 10 पैसे की मजबूती के साथ खुला. RBI की आर्बिट्रेज पोजीशन खत्म करने की डेडलाइन और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार की दिशा तय की है. विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार फिलहाल सतर्क रुख में है.
मार्च महीने में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में रिकॉर्ड ₹40,450 करोड़ का निवेश दर्ज किया गया है. SIP के जरिए निवेश ने नया उच्च स्तर छुआ, जबकि डेट फंड्स से भारी निकासी देखने को मिली. विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में आई गिरावट को निवेशकों ने मौके के रूप में इस्तेमाल किया.
देश में लागू नए लेबर कोड के तहत कर्मचारियों के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया गया है, जो आने वाले समय में नौकरीपेशा लोगों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत कर सकता है. अब कुछ श्रेणी के कर्मचारियों...