PM Modi: आज बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स’ का विमोचन किया. इस दौरान पीएम मोदी ने अपनी मां को याद किया. उन्होंने कहा कि आज भी मैं मां की कमी महसूस करता हूं.
मां को याद कर भावुक हुए PM Modi
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “मैं भाग्यशाली रहा हूं कि मेरी मां सौ साल से भी अधिक समय तक जीवित रहीं और मुझे आशीर्वाद देती रहीं. उसके बावजूद आज भी मैं मां की कमी महसूस करता हूं.”
रामनाथ कोविंद के जीवन को लेकर कही ये बात
पीएम मोदी ने रामनाथ कोविंद के जीवन के बारे में बात करते हुए कहा कि हम सभी अनुभव करते हैं कि इंसान का एक स्वभाव होता है और लोग अपनी सफलता का श्रेय खुद को देते हैं, जबकि जीवन की मुश्किलों और कठिनाइयों के लिए समाज को जिम्मेदार ठहराते हैं. मगर जब हृदय उदार हो, भारतीय संस्कार हो, तब व्यक्ति समाज की कमियां निकालने में समय नहीं गंवाता है. वह उसके सकारात्मक पक्ष पर फोकस करता है. वह अपनी सफलता में समाज को बराबर की भागीदार मानता है. रामनाथ कोविंद की आत्मकथा और उसका शीर्षक इसके उदाहरण हैं.
Speaking at the release of ‘Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles,’ the autobiography of former President Shri Ram Nath Kovind Ji. His journey reflects a life dedicated to public service and the progress of our nation.@ramnathkovind
https://t.co/SCsPxznLG7— Narendra Modi (@narendramodi) August 12, 2026
मां अपनी चिंता छोड़कर घर की चीजों को बचा रही थी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “रामनाथ कोविंद का कानपुर देहात के क्षेत्र में एक साधारण परिवार में जन्म हुआ. कोविंद जी ने अपनी किताब में है ‘कैसे गर्मी के मौसम में एक दिन उनके घर में आग लग गई. उनकी मां अपनी चिंता छोड़कर घर की चीजों को बचा रही थी. आखिर एक सामान्य परिवार में मां के लिए एक-एक चीज बच्चों के पालन-पोषण का जरिया होती है. उसी कोशिश में आग में फंसकर उनकी मां की मृत्यु हो गई. आप कल्पना कर सकते हैं कि छोटी सी उम्र में इस तरह की घटना कितना दर्दनाक रही होगी. यह ऐसा घटनाक्रम था, कोई भी उससे टूट सकता था, लेकिन कोविंद जी को उन मुश्किलों को मजबूत किया. पड़ोस की एक माता जी ने उनके पालन-पोषण में मदद की.”
उनकी सादगी कायम रही
पीएम मोदी ने इस दौरान कहा, “संघर्षों के बीच रामनाथ कोविंद ने शिक्षा को अपना सामर्थ बढ़ाने का मार्ग बनाया. उन्होंने मेहनत की, संसाधनों की कमी को कमजोर नहीं बनने दिया और एक ऐसे मुकाम तक पहुंचे, जिसकी कल्पना तब लोगों ने नहीं की होगी. वे भारत जैसे विशाल देश के राष्ट्रपति बने. इतने बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी कोविंद जी का विनम्र व्यक्तित्व और उनकी सादगी कायम रही.”
उनके भीतर देशसेवा की भावना थी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रामनाथ कोविंद के भीतर देशसेवा की भावना थी. मोरारजी भाई देसाई के साथ काम करके उन्हें सीखने को मिला. साथ ही,नया रास्ता मिला. वहां से राजनीति और समाजसेवा को कोविंद जी ने अपना मार्ग बनाया. वे अपने कर्तव्यों के लिए समर्पित रहे और सेवा को उन्होंने अपना लक्ष्य बनाकर काम किया. संसद में रामनाथ कोविंद का कार्यकाल इसका गवाह है.