‘मधुमक्खी की तरह हर जगह से सीखो…!’ पीएम मोदी ने ‘सुभाषित’ के जरिए दिया ज्ञान का महामंत्र

Shivam
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PM Modi Sanskrit Shlok: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोज सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर संस्कृत सुभाषित साझा करने की अपनी श्रृंखला में एक और प्रेरणादायक श्लोक पोस्ट किया है. इस बार साझा किए गए श्लोक में ज्ञान हासिल करने के साथ-साथ सही और उपयोगी बातों को पहचानने तथा उन्हें अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया है. पीएम मोदी ने इस सुभाषित के जरिए बताया कि एक कुशल और बुद्धिमान व्यक्ति वही होता है, जो छोटे-बड़े हर शास्त्र और हर स्रोत से अच्छी बातों का सार ग्रहण करता है. इसके लिए उन्होंने मधुमक्खी का उदाहरण दिया है, जो अलग-अलग फूलों पर जाकर उनमें से केवल मकरंद ग्रहण करती है.

पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत श्लोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक हैंडल से ज्ञान और विवेक पर केंद्रित यह प्रसिद्ध सुभाषित साझा किया:

“अणुभ्यश्च महद्भ्यश्च शास्त्रेभ्यः कुशलो नरः.
सर्वतः सारमादद्यात् पुष्पेभ्य इव षट्पदः॥”

यह श्लोक सामने आने के बाद ज्ञान, संस्कृत और भारतीय संस्कृति से जुड़े लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया. सुभाषित के माध्यम से यह संदेश सामने आता है कि सीखने के लिए किसी एक स्रोत तक सीमित रहने के बजाय हर जगह मौजूद अच्छी और उपयोगी बातों को समझना चाहिए.

मधुमक्खी की तरह हर जगह से ग्रहण करें अच्छी बातें

इस श्लोक का भाव बेहद सरल और व्यावहारिक है. जिस तरह एक षट्पद यानी छह पैरों वाली मधुमक्खी अलग-अलग फूलों पर जाती है और वहां से केवल मकरंद ग्रहण करती है, उसी तरह मनुष्य को भी अलग-अलग ग्रंथों, विचारों, अनुभवों और लोगों से अच्छी बातों का सार ग्रहण करना चाहिए. यह सीख व्यक्ति को दूसरों की कमियों पर ध्यान देने के बजाय उनके भीतर मौजूद ज्ञान और सकारात्मक बातों को पहचानने की प्रेरणा देती है. यानी स्रोत छोटा हो या बड़ा, उससे मिलने वाली अच्छी सीख को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

आज के डिजिटल दौर में क्यों खास है यह संदेश

आज के समय में इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए लोगों के सामने बड़ी मात्रा में जानकारी उपलब्ध है. ऐसे में केवल जानकारी हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसमें से सही, उपयोगी और सकारात्मक बातों को पहचानना भी जरूरी है. पीएम मोदी द्वारा साझा किया गया यह सुभाषित इसी विवेक की ओर इशारा करता है. एक समझदार व्यक्ति हर जगह से सीखने की कोशिश करता है और प्राप्त ज्ञान में से उपयोगी बातों को अपने जीवन में अपनाता है. यही दृष्टिकोण व्यक्ति के विकास के साथ समाज के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है.

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