PM Modi का आज का ‘सुभाषितम्’: क्या है उस ‘पूर्णता’ का रहस्य, जो बदल सकता है आपकी जिंदगी ?

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

PM Modi Subhashitam: आज की तेज रफ्तार और व्यस्त जीवनशैली में हम अक्सर खुद को अधूरा महसूस करने लगते हैं. कभी करियर की दौड़ तो कभी रिश्तों की जिम्मेदारियां हमें भीतर से खाली-सा बना देती हैं और लगता है कि जीवन में कुछ कमी है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साझा किया गया आज का ‘सुभाषितम्’ संदेश खास महत्व रखता है. उन्होंने ईशावास्य उपनिषद का एक ऐसा गूढ़ श्लोक प्रस्तुत किया है, जो न केवल हमारी सोच को नया दृष्टिकोण देता है, बल्कि मानसिक शांति और सच्ची सफलता की दिशा भी दिखाता है.

यह केवल एक साधारण संस्कृत मंत्र नहीं, बल्कि सृष्टि के गहरे सत्य को समझने की एक महत्वपूर्ण कुंजी है, जिसे जानना और अपनाना हर व्यक्ति के लिए उपयोगी हो सकता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जिस श्लोक का जिक्र किया, वह है-

पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते.
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥

सुनने में यह श्लोक जितना सरल और मधुर लगता है, इसका अर्थ उतना ही गहरा और रूहानी है. आसान भाषा में समझें तो यह कहता है कि वह परम तत्व (ईश्वर या ब्रह्मांड) अपने आप में ‘पूर्ण’ है, और यह जो सृष्टि हमारे सामने दिख रही है, यह भी उसी का हिस्सा होने के कारण ‘पूर्ण’ ही है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उस पूर्णता में से अगर हम कुछ निकाल भी लें, तब भी पीछे जो बचता है, वह अधूरा नहीं बल्कि ‘पूर्ण’ ही रहता है.

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सफलता और नेतृत्व का असली मंत्र

पीएम मोदी का यह संदेश हमें याद दिलाता है कि महानता पदों या सत्ता से नहीं, बल्कि आपके आचरण की ‘पूर्णता’ से आती है. जब व्यक्ति भीतर से संतुष्ट और पूर्णता का अनुभव करता है, तभी वह बिना किसी स्वार्थ के दूसरों के लिए काम कर पाता है. ऐसी सोच न केवल सेवा की भावना को मजबूत करती है, बल्कि समाज में सम्मान, विश्वास और आत्मविश्वास भी कई गुना बढ़ा देती है.

आज के दौर में, जब हर कोई अधिक पाने की दौड़ में लगा है, यह श्लोक हमें ठहरकर अपने भीतर की शक्ति और संतुलन को पहचानने की प्रेरणा देता है. चाहे आप परिवार का नेतृत्व कर रहे हों या किसी संगठन का, यह मंत्र आपको अधिक संवेदनशील, संतुलित और बेहतर व्यक्तित्व बनने की दिशा दिखा सकता है.

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