रांची: दुर्गा पूजा के दौरान भव्य पंडालों, आकर्षक सजावट और बड़े बजट वाले आयोजनों की खूब चर्चा होती है. लेकिन झारखंड की राजधानी रांची में एक छोटे से मोहल्ले ने अनोखी थीम के जरिए लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. हीनू स्थित शुक्ला कॉलोनी में बना दुर्गा पूजा पंडाल झालमुड़ी और गोलगप्पों की थीम पर तैयार किया गया है. रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी इन लोकप्रिय चीजों को रचनात्मक अंदाज में सजावट का हिस्सा बनाकर समिति ने पंडाल को खास बना दिया है.
छोटे बजट में अनोखी थीम का कमाल
रांची के हीनू स्थित शुक्ला कॉलोनी में सनातन संघ दुर्गा पूजा समिति की ओर से इस पंडाल का निर्माण कराया गया है. शहर के बड़े और भव्य पूजा पंडालों के बीच इसकी अनूठी सजावट लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. इसकी खासियत यह है कि सजावट में ऐसी चीजों का इस्तेमाल किया गया है, जिन्हें लोग आमतौर पर सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानों पर देखते हैं. यह पंडाल इस बात की मिसाल है कि किसी आयोजन को खास बनाने के लिए हमेशा बड़े बजट की जरूरत नहीं होती. रचनात्मक सोच और नए प्रयोग के जरिए छोटी-सी जगह को भी आकर्षक बनाया जा सकता है. यही वजह है कि शुक्ला कॉलोनी के इस पंडाल की चर्चा हो रही है.
पीएम मोदी को झालमुड़ी खाते देख आया आइडिया
इस पंडाल की थीम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है. पूजा समिति के सदस्यों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झालमुड़ी खाते हुए देखने के बाद उन्हें इस तरह की थीम तैयार करने का विचार आया. झालमुड़ी बंगाल का लोकप्रिय स्ट्रीट फूड है, जिसे मुरमुरे, मसालों और अन्य सामग्री को मिलाकर तैयार किया जाता है. यह नाश्ता अपने चटपटे स्वाद के लिए जाना जाता है. इसी लोकप्रिय व्यंजन से प्रेरणा लेते हुए समिति ने स्थानीय खानपान को दुर्गा पूजा की सजावट का हिस्सा बनाने का फैसला किया.
कागज के ठोंगों से सजावट, छत से लटकते दिखते हैं गोलगप्पे
पंडाल की सजावट इसे दूसरे पंडालों से अलग बनाती है. इसके बाहरी हिस्से को अखबार से बने कागज के ठोंगों से सजाया गया है. ये ठोंगे उन कागज के पैकेटों की याद दिलाते हैं, जिनमें सड़क किनारे दुकानदार ग्राहकों को झालमुड़ी परोसते हैं. पंडाल के अंदर प्रवेश करते ही छत से लटकते गोलगप्पे नजर आते हैं. इन्हें इस तरह सजाया गया है कि पूरा माहौल किसी अनोखी स्ट्रीट फूड दुकान जैसा दिखाई देता है. वहीं, दीवारों पर हाथ से बनाई गई तस्वीरों में गोलगप्पे बेचने वाले और झालमुड़ी तैयार करने वाले दुकानदारों को दर्शाया गया है. इस तरह बाजार और सड़कों पर रोजाना दिखाई देने वाली चीजों को कलात्मक रूप देकर दुर्गा पूजा की सजावट में शामिल किया गया है. आम चीजों का यह अनोखा इस्तेमाल पंडाल को खास पहचान देता है.
आधुनिक सजावट के बीच मां दुर्गा की पारंपरिक प्रतिमा
पंडाल की एक और खासियत मां दुर्गा की प्रतिमा है. जहां आसपास की सजावट स्ट्रीट फूड की थीम पर आधारित है, वहीं मां दुर्गा की प्रतिमा को पारंपरिक रूप दिया गया है. इस तरह आधुनिक और रचनात्मक सजावट के बीच धार्मिक आस्था और परंपरा का भी पूरा ध्यान रखा गया है. शुक्ला कॉलोनी का यह पंडाल दिखाता है कि दुर्गा पूजा की खूबसूरती सिर्फ विशाल निर्माण या भारी-भरकम बजट में नहीं, बल्कि नए विचारों और स्थानीय संस्कृति से जुड़ाव में भी छिपी होती है. झालमुड़ी और गोलगप्पों जैसी आम चीजों को अनोखे अंदाज में पेश करके समिति ने पूजा पंडाल को एक अलग पहचान देने की कोशिश की है.

