Sabarimala AI Management System: विश्व प्रसिद्ध सबरीमाला भगवान अयप्पा मंदिर में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए अब मंदिर प्रशासन भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह हाईटेक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है. त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) आगामी तीर्थयात्रा सीजन से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित आधुनिक ‘पिल्ग्रिम मैनेजमेंट सिस्टम’ लागू करने की तैयारी कर रहा है. इस नई तकनीक का उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षा बढ़ाना, भीड़ नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाना और तीर्थयात्रा को अधिक सुगम बनाना है.
‘विज़न सबरीमाला’ परियोजना के तहत होगी शुरुआत
त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के अध्यक्ष के. जयकुमार ने देशभर के विशेषज्ञों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी दी. उन्होंने बताया, “यह AI पहल ‘विज़न सबरीमाला’ प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसे पहले ही केरल हाई कोर्ट के सामने रखा जा चुका है और कोर्ट ने इसे मंज़ूरी भी दे दी है.” बोर्ड का मानना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से सबरीमाला में श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव देने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी.
कैसे काम करेगा AI आधारित पिल्ग्रिम मैनेजमेंट सिस्टम?
बैठक में शामिल ADGP मनोज अब्राहम ने इस तकनीक की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह प्लेटफॉर्म कई आधुनिक तकनीकों का संयोजन होगा. इसके तहत हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे, इन्फ्रारेड सेंसर, ड्रोन और जीपीएस मैपिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा. इनकी मदद से तीर्थयात्रियों की आवाजाही पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और संभावित भीड़भाड़ की स्थिति का पहले से आकलन किया जा सकेगा.
भीड़ बढ़ने से पहले ही मिलेगा अलर्ट
नई प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यह किसी क्षेत्र में भीड़ बढ़ने से पहले ही उसकी भविष्यवाणी कर सकेगी. यदि किसी मार्ग पर जाम या अत्यधिक भीड़ की स्थिति बनने वाली होगी तो AI सिस्टम संबंधित अधिकारियों को तत्काल अलर्ट भेजेगा. साथ ही यह आवश्यक कदम उठाने के सुझाव भी देगा, जिससे समय रहते स्थिति को नियंत्रित किया जा सके. भारी बारिश, बिजली गिरने या अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में भी यह प्रणाली मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगी.
श्रद्धालुओं को मिलेगा लाइव रूट अपडेट
AI आधारित यह सिस्टम श्रद्धालुओं को भी रियल टाइम जानकारी उपलब्ध कराएगा. जिस प्रकार गूगल मैप्स सड़क पर ट्रैफिक की स्थिति बताता है, उसी प्रकार यह प्लेटफॉर्म श्रद्धालुओं को बताएगा कि किस मार्ग पर कितनी भीड़ है और दर्शन के लिए कितना समय लग सकता है. इससे श्रद्धालु अपनी यात्रा की बेहतर योजना बना सकेंगे और अनावश्यक भीड़ से बच सकेंगे.
पुलिस बल पर निर्भरता होगी कम
सबरीमाला यात्रा के दौरान हर वर्ष बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती करनी पड़ती है. नई तकनीक लागू होने के बाद कई व्यवस्थाएं स्वचालित रूप से संचालित की जा सकेंगी. इससे भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती पर निर्भरता कम होगी और हर सीजन में अधिकारियों के बदलने के बावजूद भीड़ प्रबंधन का तरीका एक समान बना रहेगा.
फेशियल रिकग्निशन से मिनटों में मिलेंगे लापता लोग
पठानमथिट्टा जिला पुलिस प्रमुख आर. आनंद ने बताया, “सुरक्षा और लापता लोगों की तलाश के लिए ‘फेशियल रिकग्निशन’ का इस्तेमाल किया जाएगा.” उन्होंने बताया कि यदि भीड़भाड़ के दौरान कोई बच्चा या बुजुर्ग लापता हो जाता है, तो उसकी तस्वीर को कैमरा नेटवर्क में अपलोड करते ही कुछ ही मिनटों में उसकी पहचान और लोकेशन का पता लगाया जा सकेगा. इसके अलावा यह तकनीक संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने में भी पुलिस की मदद करेगी, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी.
अगस्त तक पूरी होगी तकनीकी प्रक्रिया
TDB अध्यक्ष जयकुमार के अनुसार, “इस प्रोजेक्ट के लिए पुलिस विभाग के साथ अंतिम दौर की चर्चा चल रही है. जल्द ही इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल या एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी किया जाएगा.” उन्होंने बताया कि बोर्ड का लक्ष्य अगस्त महीने तक सभी प्रारंभिक और तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा कर कार्य आवंटित करना है, ताकि आगामी तीर्थयात्रा सीजन में इस प्रणाली को लागू किया जा सके.
‘क्लीन सबरीमला, ग्रीन सबरीमला’ पर रहेगा विशेष फोकस
‘विज़न सबरीमाला’ परियोजना केवल तकनीकी सुधारों तक सीमित नहीं है. इसके तहत स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है. सुचित्व मिशन के सहयोग से नए नियम तैयार किए जा रहे हैं. मंदिर परिसर और यात्रा मार्गों पर संचालित दुकानों और होटलों के टेंडर में कचरा प्रबंधन की शर्तों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा. प्रशासन का लक्ष्य पूरे तीर्थ क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है.
पड़ोसी राज्यों में चलेगा बड़ा जागरूकता अभियान
जयकुमार ने बताया, “सबरीमला आने वाले लगभग 75 प्रतिशत श्रद्धालु आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु से आते हैं.” उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और यात्रा नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए इन राज्यों में उनकी स्थानीय भाषाओं में व्यापक अभियान चलाया जाएगा. सोशल मीडिया, पत्रिकाओं और अन्य संचार माध्यमों के जरिए श्रद्धालुओं को जागरूक किया जाएगा.
तकनीक और आस्था का नया संगम
सबरीमाला मंदिर में AI आधारित पिल्ग्रिम मैनेजमेंट सिस्टम लागू होने के बाद श्रद्धालुओं को अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिलने की उम्मीद है. यह परियोजना आधुनिक तकनीक और धार्मिक आस्था के समन्वय का एक बड़ा उदाहरण बन सकती है और भविष्य में देश के अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों के लिए भी मॉडल साबित हो सकती है.
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