New Delhi: दिल्ली में सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद फरार चल रहे पीजी ऑपरेटर शुभम त्यागी ने पटियाला हाउस कोर्ट में सरेंडर कर दिया है. हादसे के बाद से ही पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश कर रही थीं. कोर्ट ने शुभम और एक अन्य आरोपी सुधांशु को दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है. मकान मालिक हरिराम गुप्ता ने शुभम को एक फ्लोर लीज पर दिया हुआ था.
दो दिन की पुलिस कस्टडी पूरी
इससे पहले मामले में गिरफ्तार तीन अन्य आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया. इनमें बिल्डिंग मालिक का बेटा महेश गुप्ता, ठेकेदार सनोज और पीजी ऑपरेटर सुधांशु शामिल हैं. इन तीनों की दो दिन की पुलिस कस्टडी पूरी हो गई थी. इस दर्दनाक हादसे में सात लोगों की जान चली गई थी और करीब 12 लोग घायल हुए थे. पुलिस अब शुभम त्यागी और सुधांशु से कस्टडी में कड़ी पूछताछ करेगी. जांच अधिकारी सुधांशु के मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेज चुके हैं. पुलिस उसके कॉल रिकॉर्ड और चैट की बारीकी से जांच कर रही है.
हादसे के तुरंत बाद किससे किया था संपर्क
पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि हादसे के तुरंत बाद उसने किससे संपर्क किया था. डिजिटल सबूतों से घटना के पीछे की लापरवाही समझने में मदद मिलेगी. जांच में सामने आया है कि शुभम और सुधांशु मिलकर ‘हॉस्टल डेज’ नाम से पीजी चलाते थे. दोनों ने अगस्त 2025 में 1.05 लाख रुपए महीने के किराए पर चार मंजिलें लीज पर ली थीं. अब कस्टडी में दोनों से लीज और निर्माण से जुड़े अहम सवाल पूछे जाएंगे.
समय-समय पर निर्देशों के पालन की निगरानी
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सत्य निकेतन हादसे केस को दिल्ली हाईकोर्ट से ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया. जस्टिस एहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने इस पर अहम टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि अब इस मामले में बात आगे बढ़ने लगी है. हाईकोर्ट समय-समय पर अपने निर्देशों के पालन की निगरानी करता रहेगा. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि नगर निगम अब ज्यादा ध्यान से कार्रवाई कर रहा है. अवैध निर्माण और पीजी के खिलाफ एक्शन शुरू हो गया है. इसके बाद कोर्ट ने कहा कि मामले को ट्रांसफर करने की जरूरत नहीं है.
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