ऊर्जा संकट के बीच बड़ी राहत: भारत बना अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर ग्रोथ मार्केट, US भी छूटा पीछे

New Delhi: भारत ने सोलर एनर्जी जेनरेशन के मामले में उल्‍लेखनीय सफलता हासिल की है. भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वर्ष 2025 में वार्षिक सौर ऊर्जा क्षमता वृद्धि के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर ग्रोथ मार्केट बन गया है. केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल एक्स पर पोस्‍ट शेयर कर बताया कि भारत की सौर ऊर्जा विकास गाथा वैश्विक स्तर पर नए मानक स्थापित कर रही है.

अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान

उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में भारत ने वार्षिक सौर क्षमता वृद्धि के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल किया है. जोशी के अनुसार, मजबूत सरकारी नीतियों, टेक्‍नोलॉजिकल इनोवेशन और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे की बदौलत भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता प्रमुख सौर ऊर्जा बाजार बनकर उभरा है. अधिकारियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय रिन्‍यूवेबल एनर्जी एजेंसी (आईआरईएनए) की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2025 के दौरान भारत ने 37 गीगावाट (GW) से अधिक नई सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जबकि इसी अवधि में अमेरिका ने 34 गीगावाट सौर क्षमता का विस्तार किया.

यह उपलब्धि देश में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की तेज प्रगति

इस उपलब्धि ने भारत को वैश्विक रैंकिंग में अमेरिका से आगे पहुंचा दिया. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा बाजार बन चुका है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की तेज प्रगति को दर्शाती है और इससे अधिक भरोसेमंद, कुशल तथा टिकाऊ सौर ऊर्जा इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के निर्माण को बल मिलेगा. भारत की रिन्‍यूवेबल एनर्जी कैपेसिटी में लगातार हो रही वृद्धि का असर वैश्विक रैंकिंग में भी दिखाई दे रहा है.

सूची में चीन पहले और अमेरिका दूसरे स्थान पर

अप्रैल 2026 में जारी आईआरईएनए के आंकड़ों के अनुसार, कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है. इस सूची में चीन पहले और अमेरिका दूसरे स्थान पर है. भारत ने इस मामले में ब्राजील को पीछे छोड़ दिया है. दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, चीन के पास 2,258.02 गीगावाट रिन्‍यूवेबल एनर्जी कैपेसिटी है, जबकि अमेरिका 467.92 गीगावाट के साथ दूसरे स्थान पर है.

तीसरे स्थान पर है भारत 

भारत 250.52 गीगावाट क्षमता के साथ तीसरे स्थान पर है. इसके बाद ब्राजील 228.20 गीगावाट और जर्मनी 199.92 गीगावाट क्षमता के साथ चौथे और पांचवें स्थान पर हैं. प्रह्लाद जोशी ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने 55.3 गीगावाट नॉन फॉसिल फ्यूल बेस्‍ड कैपेसिटी जोड़ी है. जुलाई 2025 में देश ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की जब कुल 203 गीगावाट बिजली मांग में से 51.5 प्रतिशत हिस्सेदारी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरी की गई.

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