Bharat Express Mega Conclave: भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क के तीसरे स्थापना दिवस के अवसर पर दिल्ली में आयोजित कॉन्क्लेव में बॉलीवुड के दिग्गज फिल्म निर्माता बोनी कपूर ने शिरकत की. इस खास मौके पर उन्होंने फिल्म निर्माण के अपने अनुभवों, चुनौतियों और फिल्मों के प्रति अपने जुनून को साझा किया. उन्होंने बताया कि कैसे एक फिल्म निर्माता के लिए मुनाफा कमाने से ज्यादा महत्वपूर्ण कहानी के प्रति ईमानदारी बरतना होता है.
‘फिल्म निर्माण में गणित से ज्यादा दिल की सुनते हैं हम’
भारत एक्सप्रेस के मंच पर बोनी कपूर ने एक बहुत ही रोचक बात कही. उन्होंने बताया कि जब भी वह किसी फिल्म की योजना बनाते हैं, तो वह कभी भी नफे-नुकसान का हिसाब लगाकर काम शुरू नहीं करते. उन्होंने इसे अपना ‘हैंडीकैप’ यानी कमजोरी बताते हुए कहा कि वह हमेशा दिल से फिल्में बनाते हैं. उनके अनुसार, जब कोई काम दिल से किया जाता है, तो उसमें गणित या कैलकुलेशन के लिए जगह नहीं बचती. उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे विकास कार्यों में कभी-कभी बजट से ऊपर जाकर काम करना पड़ता है, वैसे ही फिल्मों में भी वह कहानी को बेहतर बनाने के लिए बजट की परवाह नहीं करते.
‘मुनाफा नहीं, कहानी की ईमानदारी है सबसे ऊपर’
बोनी कपूर ने स्पष्ट किया कि एक फिल्म निर्माता के रूप में उनके लिए मुनाफा कमाना हमेशा पहली प्राथमिकता नहीं होती. हालांकि उनके दिमाग में एक मोटा-मोटी गणित रहता है कि फिल्म का मार्केट दायरा क्या है, लेकिन वह प्रॉफिट के बारे में बाद में सोचते हैं. उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं कि हर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बंपर कमाई ही करे, लेकिन वह फिल्म ऐसी होनी चाहिए जिसे देखकर निर्माता को गर्व महसूस हो.
फिल्म ‘मैदान’ और कोरोना महामारी की चुनौतियां
अपनी फिल्म ‘मैदान’ का जिक्र करते हुए बोनी कपूर भावुक नजर आए. उन्होंने बताया कि ‘मैदान’ उनकी पसंदीदा फिल्मों में से एक है. यह फिल्म भारतीय फुटबॉल के उस कोच की कहानी थी जिसने देश को पहला गोल्ड मेडल दिलाया था. बोनी कपूर ने साझा किया कि कोविड महामारी के दौरान फिल्म का सेट चार साल तक खड़ा रहा. इस बीच तूफान और बारिश की वजह से सेट पूरी तरह नष्ट भी हो गया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने उसी सेट को दोबारा लगवाया क्योंकि वह कहानी के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते थे. उन्होंने कहा कि अगर वह केवल फायदे के बारे में सोचते, तो सेट हटाकर फिल्म को वहीं समेट देते.
देशभक्ति और प्रेरणादायक सिनेमा का महत्व
कॉन्क्लेव के दौरान बोनी कपूर की फिल्मों जैसे ‘मिस्टर इंडिया’, ‘पुकार’ और ‘वांटेड’ की भी चर्चा हुई. उन्होंने बताया कि ‘पुकार’ और ‘वांटेड’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने देशभक्ति और समाज की सफाई के संदेश को पर्दे पर उतारा. उन्होंने कहा कि एक अच्छी फिल्म वही है जो दर्शकों को प्रेरित करे और इतिहास के उन पन्नों को सामने लाए जिनसे लोग अनजान हैं. ‘मैदान’ फिल्म के जरिए उन्होंने यही कोशिश की थी कि कैसे मेलबर्न ओलंपिक में भारत सेमीफाइनल तक पहुंचा था, जिसका जिक्र इतिहास में कम मिलता है.
भारत एक्सप्रेस मेगा कॉन्क्लेव में बोनी कपूर की मौजूदगी ने सिनेमाई जगत के एक अलग पहलू को दर्शकों के सामने रखा. उनकी बातों से यह साफ जाहिर हुआ कि फिल्म निर्माण केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक कला है जिसमें जुनून और ईमानदारी का होना बहुत जरूरी है. उनके इस प्रेरक संबोधन के बाद भारत एक्सप्रेस की टीम की ओर से उन्हें सम्मानित भी किया गया.

