ISRO का NVS-03 नेविगेशन सैटेलाइट लॉन्च, PM मोदी ने दी बधाई, जानिए क्या है इसकी खासियत

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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ISRO NVS-03: भारत की सैन्य ताकत को अब आसमान से एक और सुरक्षा कवच मिलने वाला है. दरअसल, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 का सफल प्रक्षेपण किया है, जो भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC को फिर से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा. इससे न केवल देश में नेविगेशन सेवाओं की सटीकता और उपलब्धता बेहतर होगी, बल्कि मिसाइलों की दिशा तय करने से लेकर लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों के संचालन तक में भारतीय सेना को मदद मिल सकती है.

इस कामयाबी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ISRO के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी है. उन्होंने शनिवार को एक्स पर लिखा कि ‘NVS-03 का प्रक्षेपण भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. बेहतर क्षमताओं से लैस यह सैटेलाइट आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के साथ देश के लोगों को नेविगेशन सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद करेगा.’

NavIC के सिर्फ 3 सैटेलाइट बचे थे, अब 4 हुए

बता दें कि भारत की अपनी नेविगेशन प्रणाली NavIC पिछले कुछ समय से सैटेलाइट की कमी से जूझ रही थी. ऐसे में जुलाई 2026 में संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, इसके सिर्फ तीन सैटेलाइट IRNSS-1B, IRNSS-1I और NVS-01 पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाएं दे रहे थे. जबकि बुनियादी पोजिशनिंग सेवा के लिए चार सक्रिय सैटेलाइट की जरूरत होती है. इस कारण NavIC स्वतंत्र रूप से GPS जैसी पोजिशनिंग सेवा देने की स्थिति में नहीं था. हालांकि, इसकी टाइमिंग सेवा काम कर रही थी.

NVS-03 के सफल प्रक्षेपण से इस कमी को दूर करने में मदद मिली है. यह पहले से काम कर रहे तीन सैटेलाइट के साथ मिलकर NavIC को उसकी न्यूनतम परिचालन क्षमता तक पहुंचाने वाला अहम सैटेलाइट है. ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने मिशन की सफलता के बाद कहा कि इससे NavIC की पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाओं को मजबूती मिली है.

ऑर्बिट तक नहीं पहुंच पाया NVS-2

इससे पहले 29 जनवरी 2025 को लॉन्च किया गया NVS-02 अपने निर्धारित ऑर्बिट तक नहीं पहुंच पाया था. जांच में पता चला कि सैटेलाइट के ऑक्सिडाइजर लाइन में लगे पाइरो वाल्व तक इलेक्ट्रिकल सिग्नल नहीं पहुंचा, जिससे उसका प्रोपल्शन सिस्टम काम नहीं कर सका. इसके चलते सैटेलाइट को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका.

सेना के लिए क्यों अहम है भारत का अपना GPS?

  • NavIC का मजबूत होना केवल अंतरिक्ष तकनीक की उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारत की सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है. आधुनिक युद्ध में मिसाइलों, प्रिसिजन गाइडेड हथियारों, लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों को सही लोकेशन और समय की जानकारी चाहिए होती है. इसके लिए पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग यानी PNT सिग्नल बेहद जरूरी हैं.
  • अमेरिका का GPS और रूस का GLONASS दुनिया की प्रमुख सैटेलाइट नेविगेशन प्रणालियां हैं. भारतीय सैन्य बल भी जरूरत के मुताबिक कई नेविगेशन प्रणालियों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन किसी दूसरे देश की प्रणाली पर पूरी तरह निर्भर रहना रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकता है. युद्ध या तनाव की स्थिति में विदेशी प्रणालियों की सेवाओं पर प्रतिबंध, सीमित पहुंच या सिग्नल की गुणवत्ता में बदलाव का खतरा रहता है. ऐसे में NavIC भारत को अपना स्वतंत्र विकल्प उपलब्ध कराता है.

NVS-03 में क्या है खास?

NVS-03 की सबसे बड़ी खासियत इसमें लगी स्वदेशी रुबिडियम परमाणु घड़ी है. इसके साथ कुछ विदेशी परमाणु घड़ियां भी लगाई गई हैं. सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम में परमाणु घड़ी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है. इसकी मदद से सटीक समय का पता चलता है. सैटेलाइट से मिलने वाले सिग्नल को धरती तक पहुंचने में कितना समय लगा, इसी आधार पर रिसीवर अपनी लोकेशन की गणना करता है.

आम लोगों को क्या फायदा होगा?

NavIC की मजबूती का फायदा केवल सेना को नहीं मिलेगा. इसके नागरिक इस्तेमाल भी काफी व्यापक हैं. ISRO चीफ ने भी NavIC को ‘वन नेशन, वन टाइम’ परियोजना के लिए महत्वपूर्ण बताया है.

  • रेलवे: ट्रेनों की रियल टाइम लोकेशन ट्रैक करने में मदद मिलेगी.
  • सड़क परिवहन: वाहनों की ट्रैकिंग और नेविगेशन सेवाएं बेहतर हो सकती हैं.
  • समुद्री परिवहन: जहाजों की लोकेशन और उनके आवागमन की निगरानी आसान होगी.
  • आपदा प्रबंधन: आपातकालीन परिस्थितियों में लोकेशन आधारित सेवाओं को मजबूती मिलेगी.
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