PM Modi: डीएमके का साथ छोड़ने पर PM मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा- ‘पीठ में छुरा घोंपा…’

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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नई दिल्लीः तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को शपथ लेने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी. इसके साथ ही भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा. हालांकि, पीएम मोदी ने विजय की ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) की सहयोगी पार्टी कांग्रेस पर DMK जैसे पुराने दोस्त को छोड़ने पर तीखा तंज कसा.

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को “पीठ में छुरा घोंपने वाली” और “परजीवी” पार्टी बताया. उन्होंने आगे कहा, “2014 से पहले 10 वर्षों तक जिस सरकार का नेतृत्व कांग्रेस ने किया, वह काफी हद तक DMK की वजह से ही चल पाई. इसके बाद भी उसे उस पल धोखा दे दिया गया, जब राजनीतिक हवा का रुख बदला.”

पीएम मोदी ने कहा…

पीएम मोदी ने कहा, “सत्ता की लालच में अंधी होकर, सत्ता-लोभी कांग्रेस ने पहला मौका मिलते ही DMK की पीठ में छुरा घोंप दिया. अब कांग्रेस को एक और पार्टी की जरूरत है. एक ऐसी पार्टी, जिसकी पीठ पर सवार होकर वह राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बनी रह सके.”

वहीं, विजय के नौ मंत्रियों वाले नए मंत्रिमंडल में युवा और अनुभवी नेताओं का मिश्रण है, जिसमें TVK प्रमुख की मुख्य टीम के सदस्यों को जगह मिली है. इसमें कांग्रेस का कोई भी नेता शामिल नहीं है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान ही ऐसे साफ संकेत मिल गए थे कि कांग्रेस पार्टी विजय पर पैनी नजर रखे हुए थी.

कांग्रेस को DMK ने भी कई बार घेरा

चुनाव से पहले DMK द्वारा बुलाई गई कई बैठकों में कांग्रेस शामिल ही नहीं हुई. हालांकि, PM मोदी ने कांग्रेस के बारे में जो कुछ अब कहा, वही बात DMK ने भी तब कह दी थी, जब उसे पता चला कि कांग्रेस ने TVK को बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में मदद करने का फैसला किया है. टिप्पणियों में अक्सर “पीठ में छुरा घोंपने वाला” (Backstabber) शब्द के रूप में यह आलोचना देखने को मिली.

इसके साथ ही DMK ने कहा, “कांग्रेस ने पीठ में छुरा घोंपकर बहुत बड़ा विश्वासघात किया है. स्टालिन की पार्टी ने कहा कि कांग्रेस ने अपना पुराना रवैया नहीं बदला है. इसके अलावा प्रस्ताव में कहा गया, “हमारे गठबंधन में कांग्रेस को राज्यसभा की एक सीट और विधानसभा की 28 सीटें दी गई थीं. उसने तीन दिनों के अंदर ही किसी दूसरी पार्टी का रुख कर लिया, जिससे गठबंधन के सदस्यों की कड़ी मेहनत से मिली जीत भी खतरे में पड़ गई.”

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