जन्माष्टमी पर बांके बिहारी के दर्शन करने हैं, तो पहले ही कर लें ये काम, वरना नहीं मिलेगी एंट्री!

Must Read

Banke Bihari Temple Mathura: श्री कृष्ण की नगरी मथुरा वृंदावन में बांके बिहारी के मंदिर में भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर से भक्‍त दर्शन के लिए आते हैं. कृष्ण जन्माष्टमी पर तो यहां इतनी भीड़ होती है कि नियंत्रित कर पाना भी मुश्किल हो जाता है. अब से कुछ ही दिन बाद जन्‍माष्‍टमी का त्यौहार है. इसको लेकर भारी भीड़ जुटने की पूरी संभावना है. भीड़ को कंट्रोल करने के लिए मंदिर प्रशासन की तरफ से कई नए नियम लगाए गए हैं. ऐसे में यदि आप जन्माष्टमी के दिन बांके बिहारी का दर्शन करने जाने वाले हैं और आसानी से दर्शन करना चाहते हैं तो इन बदले नियमों के बारे में जरूर जान लें.

दर्शन के लिए कराना होगा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन
आपको बता दें कि जन्माष्टमी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने बांके बिहारी मंदिर में भीड़ को नियंत्रण करने के लिए दो व्यवस्थाएं लागू की है. पहला यह कि आपको जन्माष्टमी के मौके पर बांके बिहारी के दर्शन के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा. वहीं दूसरी तरफ भीड़ के कारण मंदिर के अंदर मोबाइल फोन को भी बैन कर दिया गया है, क्योंकि लोग अंदर जाते हैं और दर्शन से पहले मोबाइल से तस्वीरें खींचना शुरू कर देते हैं, सेल्फी लेते हैं और तो और रील्स भी बनाने लगते हैं. ऐसे में मंदिर परिसर में भीड़ जमा हो जाती है, जिसे नियंत्रण करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में अगर आप भी जन्माष्टमी पर वृन्दावन जाने की प्लानिंग कर रहे हैं तो उससे पहले सभी गाइडलाइन को अवश्य फॉलो करें. वरना बिना दर्शन किए ही वापस लौटना पड़ सकता है.

जानिए कब खुलेंगे कपाट
जन्माष्टमी के दिन बांके बिहारी मंदिर के कपाट ग्रीष्मकालीन समय के अनुसार सुबह 7:45 पर खोले जाएंगे और 7:55 पर मंदिर के सेवायतों द्वारा बांके बिहारी की श्रृंगार आरती की जाएगी. इसके बाद 11 बजे बांके बिहारी को राज भोज भी दिया जाएगा. फिर 11:30 बजे से ठाकुर जी के दर्शन करवाए जाएंगे. 11:55 पर राजभोज आरती के बाद बांके बिहारी के पट को बंद कर दिए जाएंगे.

ये भी पढ़ेंः 30 साल बाद कृष्णजन्माष्टमी पर बना दुर्लभ संयोग, इस मुहूर्त में पूजा करने से चमक जाएगी किस्मत

Latest News

अर्थव्यवस्था पर सियासत नहीं, आंकड़े देते हैं जवाब”- डॉ. राजेश्वर सिंह

लखनऊ। सपा प्रमुख के हालिया बयान न तो आश्चर्यजनक हैं और न ही नए। जिनकी राजनीति तुष्टिकरण, भ्रष्टाचार, अंधविश्वास...

More Articles Like This