‘कांग्रेस ने सत्ता पाने के लिए 1947 में देश का कर दिया विभाजन’, बंटवारे पर छलका CM योगी का दर्द

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Holocaust Memorial Dayः भारत में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मनाया जा रहा है. लखनऊ में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा. सीएम ने कहा कि आज पूरा देश 1947 में विभाजन की उस भीषण त्रासदी के स्मृति दिवस के साथ जुड़ा हुआ है, जो विश्व मानवता के इतिहास में सबसे काले अध्यायों में से एक है. जब करोड़ों हिंदुओं को अपने ही मातृभूमि से अपनी ही जन्म भूमि से विस्थापित होना पड़ा था और लाखों की संख्या में शून्य और संवेदना की बात तो दूर, अपनी स्वयं की सत्ता प्राप्त होने की लिपसा इस हद तक एक सनातन राष्ट्र को विभाजन की ओर धकेल करके उसके टुकड़े कर दिए गए। यानी भारत विभाजन के त्रासदी उसी दिवस की ओर हम सबका ध्यान आकर्षित कराती है.

सीएम योगी ने कहा कि यह दिवस केवल एक स्मृति दिवस मात्र नहीं है. यह इतिहास के पन्नों को उलटने जैसा नहीं है. यह दिवस इतिहास के उन काले अध्यायों से हमें बहुत कुछ सीखने की एक प्रेरणा भी प्रदान कर रहा है. क्योंकि यह केवल उसका स्मरण भर मात्र करने भर से इसकी समस्या का समाधान नहीं होने वाला है. ये समस्या क्यों पैदा हुई? किन लोगों के कारण पैदा हुई? इसके कितने दोषियों को सजा दी गई? और आखिर कब तक देश इसकी कीमत चुकाता रहेगा. ये प्रश्न आज भी हम सबके सामने उसी मजबूती के साथ खड़े हुए हैं.

भारत को चुकानी पड़ी विभाजन की कीमत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहा कि विभाजन की कीमत भारत को चुकानी पड़ी. निर्दोष नागरिकों को चुकानी पड़ी. वो कीमत आज तक भारत चुका रहा है. लगातार चुका रहा है. ये वही कीमत है, जो कभी आतंकवाद के रूप में, कभी नक्सलवाद के रूप में, कभी माओवाद के रूप में, कभी उग्रवाद के रूप में लगातार भारतीयों को डस रहा है, लेकिन ये 1947 के पहले के उस षड्यंत्र पर हम सबकी चुप्पी की ओर भी हम सबका ध्यान आकर्षित करता है और ये लोग आज भी अपने साफगोई का प्रमाण लेकर के समाज के सामने ऐसे घूमते हैं जैसे कि भारत इन्होंने बनाया है. जैसे कि भारत अगर ये नहीं होते तो भारत नहीं बनता.

सीएम ने कांग्रेस पर साधा निशाना

सीएम योगी ने कहा कि मैं भोचक्का था जब सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट प्रधानमंत्री मोदी जी लेकर आए. एक्ट का विरोध का कोई औचित्य नहीं था, लेकिन एक्ट का प्रावधान था कि अफगानिस्तान में, पाकिस्तान में, बांग्लादेश में यानी ये तीनों भाग वह हैं, जो अखंड भारत के हिस्से हुआ करते थे. आज से नहीं, हजारों वर्षों की विरासत एक साथ जुड़ी हुई है और उसमें प्रावधान था कि इन देशों में कोई हिंदू, कोई सिख, कोई जैन, कोई बौद्ध, कोई पारसी, कोई ईसाई, अगर वहां से निकाला गया है और वह भारत में शरण लिए हुए पांच वर्ष हो गए हैं, तो उसे हम भारत की नागरिकता देंगे.

इसमें कहीं यह नहीं था कि हम मुसलमान की जमीन लेंगे या कांग्रेस की जमीन लेंगे या समाजवादी पार्टी की जमीन ले लेंगे. यह कहीं नहीं था एक्ट में कोई प्रावधान नहीं, लेकिन आंदोलन देश के अंदर करने के प्रयास हुए. आपने देखा होगा लखनऊ में भी आगजनी करने का प्रयास हुआ. कानपुर में, मेरठ में, संभल में, अलीगढ़ में, बुलंदशहर में, मुजफ्फरनगर में, सहारनपुर में जगह-जगह करने के प्रयास हुए. गनीमत थी कि उत्तर प्रदेश की जनता जनार्दन की कृपा से डबल इंजन की सरकार थी.

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