लखीमपुर खीरी में अनोखी शादी: एक-दूजे के हुए इमली का पेड़ और कुआं, डीजे की धुन पर थिरके बाराती

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Lakhimpur Kheri News: यूपी के लखीमपुर खीरी जिले के भैरमपुर गांव में एक अनोखी और रोचक शादी चर्चा लोगों में हो रही है. यहां न किसी लड़के की बारात निकली और न ही किसी लड़की का सिंदूरदान हुआ, बल्कि दूल्हा बना गांव का कुआं और दुल्हन बनी इमली का पेड़. पूरे गांव ने बड़े ही धूमधाम से इस अनोखी शादी को पारंपरिक रस्मों के बीच संपन्न कराया.

इमली का पेड़ बनी दुल्हन और कुआं बना दूल्हा

इस शादी के दौरान गांव में बारातियों ने उत्साह के बीच डीजे की धुन पर जमकर ठुमके लगाए. शादी में ग्रामीणों ने पूरी श्रद्धा से हिस्सा लिया और भोज का भी आयोजन किया गया. पंडित कृपा शंकर ने विधि-विधान के साथ आम की लकड़ी से कुएं का ‘वर स्वरूप’ पुतला तैयार किया, उसे माला-पगड़ी पहनाई और एक पवित्र धागे से सजाया. पल्लू के रूप में इस धागे का दूसरा सिरा करीब 400 मीटर दूर आम के बाग में स्थित इमली के पौधे से बांधा गया. इमली पक्ष के लोगों ने पौधे को सुहाग की सभी वस्तुओं से सजाया.

60 साल पुरानी परंपरा का निर्वाह

गांव के बुजुर्ग जगन्नाथ प्रसाद यादव के मुताबिक, इस अनोखी परंपरा की शुरुआत सन 1960 में हुई थी, जब गांव के खुशीराम यादव के कुएं का विवाह इमली के पेड़ से कराया गया था. इसके बाद 1995 में भी इसी तरह का विवाह संपन्न कराया गया. बंटवारे के बाद कुआं एक पुत्र के हिस्से में चला गया, जिससे महिलाओं को रस्में निभाने में परेशानी होने लगी. दूसरी ओर बाग का पुराना इमली का पेड़ दीमक की मिट्टी में विलुप्त हो गया.

इसी वजह से 2024 में आम के बाग में नया इमली का पौधा लाकर लगाया गया और निर्णय लिया गया कि ग्रामीण परंपरा को आगे बढ़ाते हुए फिर से कुएं और इमली का विवाह धूमधाम से कराएंगे.

ग्रामीणों में दिखा खासा उत्साह

विवाह समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति ने इस परंपरा के महत्व को एक बार फिर साबित कर दिया. गांव वालों का कहना है कि यह सिर्फ एक रीति नहीं, बल्कि प्रकृति और जल स्रोतों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक अनोखा तरीका है. यह अनोखी शादी ग्रामीण संस्कृति और परंपरा के प्रति सम्मान और सामूहिक उत्साह का एक अनोखा उदाहरण बनकर सामने आई है.

(रिपोर्ट, हर्ष गुप्ता)

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