यूपी कैबिनेट: चार लिंक एक्सप्रेस-वे निर्माण पर सहमति, एक गाय पर 50 हजार रुपये का अनुदान, 22 प्रस्तावों को मंजूरी

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Yogi Cabinet Meeting: मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. बैठक में पशुधन क्षेत्र को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने से जुड़े प्रस्ताव पर विशेष जोर दिया गया.

कैबिनेट में बताया गया कि उत्तर प्रदेश दूध उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है. इसके अलावा अंडा, ऊन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी प्रदेश की स्थिति मजबूत है. हालांकि, इन क्षेत्रों में मूल्य संवर्धन, डिजिटल प्रबंधन और संगठित बाजार व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत है.

किसानों की आय पशुपालन से बढ़ाने पर जोर

सरकार का उद्देश्य पशुपालन को किसानों की आय बढ़ाने का प्रमुख माध्यम बनाना है. इसके लिए स्टेट लैब स्टार्ट मिशन के गठन का प्रस्ताव रखा गया है. मिशन के तहत रोजगार सृजन, उद्यमिता विकास, पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने और पशु उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा.

योजना में उन्नत नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देने और गाय की नस्ल सुधारने का भी प्रावधान है. दूध उत्पादन बढ़ाकर प्रति गाय प्रतिदिन 10 लीटर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही मुर्गी और बकरी पालन को प्रोत्साहित करने के लिए भी सहायता देने की बात कही गई है.

सरकार पशु बीमा में देगी 85 फीसदी राशि

प्रस्ताव के मुताबिक,  पशुपालकों को आर्थिक सहायता देने के साथ पशुओं का बीमा भी कराया जाएगा. बीमा की कुल लागत का 85 फीसदी हिस्सा सरकार और 15 फीसदी हिस्सा किसान वहन करेंगे. योजना के तहत एक गाय पर 50 हजार रुपये का अनुदान देने का प्रावधान बताया गया है. सरकार का उद्देश्य पशुपालन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, बेहतर नस्ल और बाजार व्यवस्था के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है.

कंपनियों के मर्जर और डी-मर्जर पर स्टांप ड्यूटी का प्रावधान

उत्तर प्रदेश में कंपनियों के विलय (मर्जर) और विभाजन (डी-मर्जर) की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए स्टांप ड्यूटी से जुड़ा प्रस्ताव तैयार किया गया है. स्टांप मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि अभी तक प्रदेश में कंपनियों के मर्जर और डी-मर्जर के लिए स्टांप ड्यूटी का स्पष्ट प्रावधान नहीं था. इसके कारण उद्यमियों को प्रक्रिया के दौरान भ्रम और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था.

मंत्री के अनुसार, प्रस्ताव के तहत कंपनी के मर्जर या डी-मर्जर में शेयर वैल्यू पर 0.50 फीसदी स्टांप ड्यूटी लगाने का प्रावधान किया गया है. यदि संबंधित मामले में संपत्ति शामिल है, तो उस पर दो फीसदी स्टांप ड्यूटी का प्रस्ताव है. कंपनी का पंजीकरण कराने और कंपनी रजिस्ट्रार (आरओसी) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शेयर वैल्यू के आधार पर स्टांप ड्यूटी देनी होगी.

ड्यूटी की समस्या सर्किल रेट के आधार पर होगी दूर

रविंद्र जायसवाल ने कहा कि स्पष्ट नियम नहीं होने के कारण कई मामलों में सर्किल रेट के बराबर स्टांप ड्यूटी की मांग की जाती थी. इससे कंपनियों के विलय के दौरान उद्यमियों के सामने मुश्किलें आती थीं. प्रस्ताव लागू होने से दो कंपनियों के मिलकर एक कंपनी बनने जैसी प्रक्रियाओं में स्पष्टता आने की उम्मीद है.

मंत्री ने बताया कि गुजरात और महाराष्ट्र में इस तरह का प्रावधान है. उत्तर प्रदेश में भी इसे लागू करने की दिशा में कदम उठाया गया है. उन्होंने कहा कि स्टांप ड्यूटी का विषय समवर्ती सूची से जुड़ा होने के कारण प्रस्ताव को केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. मंजूरी मिलने के बाद इसे प्रदेश में लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

नाविकों और यात्रियों को मिलेगा बीमा कवर

उत्तर प्रदेश में जल परिवहन को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए नावों और पानी के जहाजों के पंजीकरण की व्यवस्था की जाएगी. परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि अब तक मोटर से चलने वाले जहाजों और नावों के संचालन को लेकर स्पष्ट नियमावली नहीं थी. नई व्यवस्था के तहत यांत्रिक और गैर-यांत्रिक दोनों तरह की नावों का पंजीकरण किया जाएगा.

इनलैंड वाटर अथॉरिटी बनेगी

मंत्री के अनुसार, जल परिवहन के संचालन और निगरानी के लिए इनलैंड वाटर अथॉरिटी बनाई जाएगी. परिवहन मंत्री इसके अध्यक्ष होंगे. उन्होंने बताया कि इंजन से चलने वाले बड़े जहाज यांत्रिक श्रेणी में आएंगे, जबकि गांवों में इस्तेमाल होने वाली मोटर चालित छोटी नावों के लिए अलग श्रेणी निर्धारित की जाएगी.

नावों का वर्गीकरण यात्रियों की क्षमता के आधार पर भी किया जाएगा. इसमें 10 यात्रियों वाली मोटर नाव, पांच से 10 यात्रियों वाली नाव और पांच तक यात्रियों की क्षमता वाली नाव जैसी श्रेणियां शामिल होंगी. गैर-यात्री नावों के पंजीकरण के लिए 50 रुपये शुल्क प्रस्तावित है.

नाविकों और यात्रियों का होगा बीमा

दयाशंकर सिंह ने कहा कि जल परिवहन से जुड़े छोटे और असंगठित क्षेत्र को भी नियमों के दायरे में लाया जाएगा. नावों और नाविकों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, क्योंकि फिलहाल गैर-यांत्रिक नावों से जुड़ा व्यवस्थित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. नई व्यवस्था में यात्रियों और नाविकों के बीमा का भी प्रावधान होगा.

नावों के पंजीकरण और निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को दी जाएगी. इसमें सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) प्रशासन, तहसील स्तर के अधिकारी और आरआई की भूमिका होगी.

11 नदियों पर जल परिवहन की योजना

प्रदेश की गंगा और यमुना सहित 11 नदियों पर जल परिवहन को लेकर काम किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य नदियों के माध्यम से परिवहन की संभावनाओं को विकसित करना और नाव संचालन को अधिक सुरक्षित तथा व्यवस्थित बनाना है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. इसके तहत अशासकीय सहायता प्राप्त, वित्तविहीन और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया. इसके साथ ही सैनिक स्कूल मैनपुरी के विस्तार के लिए ग्रामीण क्षेत्र में निःशुल्क जमीन देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई.

48,062 कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के 23,989, वित्तविहीन विद्यालयों के 22,541 और अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों के करीब 110 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा. इस योजना से कुल 48,062 कर्मचारी लाभान्वित होंगे.

सरकार प्रत्येक कर्मचारी के बीमा प्रीमियम के लिए 3,000 रुपये देगी. इस पर कुल 14.41 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को पांच लाख रुपये तक के इलाज की कैशलेस सुविधा मिलेगी.

1.22 लाख से अधिक बेसिक शिक्षा के कर्मचारियों को लाभ

बेसिक शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों को भी इसी तरह की चिकित्सा सुविधा देने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न श्रेणियों के कुल 1,22,305 कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा. इनमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, लिपिक, वित्तविहीन संस्थानों के कर्मचारी और जिला परियोजना से जुड़े कर्मी शामिल हैं.

सैनिक स्कूल मैनपुरी का होगा विस्तार

कैबिनेट ने सैनिक स्कूल मैनपुरी को ग्रामीण क्षेत्र में निःशुल्क जमीन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी. यह स्कूल 22 जुलाई 2019 से संचालित है. जमीन मिलने से स्कूल के विस्तार का रास्ता साफ होगा.

चार लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर सहमति, 17,542 करोड़ रुपये होंगे खर्च

उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में सहकारिता, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और एक्सप्रेसवे निर्माण से जुड़े प्रस्तावों पर अहम फैसले लिए गए. इनमें चार लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए सहमति और झांसी-ललितपुर में भंडारण क्षमता बढ़ाने की योजना शामिल है.

सहकारिता विभाग के प्रस्ताव के तहत झांसी और ललितपुर में 6.5 लाख मीट्रिक टन की अतिरिक्त भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी. इसके लिए 5.47 हेक्टेयर जमीन पर निर्माण किया जाएगा. इस योजना का उद्देश्य क्षेत्र में भंडारण की सुविधा बढ़ाना है.

ग्रेटर नोएडा में 654 करोड़ का निवेश

एफडीआई से जुड़े प्रस्ताव में एंपावर्ड कमेटी की संस्तुति को मंजूरी दी गई. इसके तहत ग्रेटर नोएडा में एकागो हॉस्पिटेलिटी की ओर से 654 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव शामिल है. ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) नीति के तहत चार कंपनियों को लेटर ऑफ कंफर्ट जारी करने पर सहमति दी गई. इनमें हैवेल्स के नोएडा में 889 करोड़ रुपये, अमेरियोराइड इंडिया एलएलपी के 112 करोड़ रुपये, मेटलाइफ ग्लोबल के 84 करोड़ रुपये और एलजी सॉफ्ट के 634 करोड़ रुपये के प्रस्ताव शामिल हैं.

तीन साल में चार लिंक एक्सप्रेस-वे बनाने की योजना

यूपीडा के प्रस्ताव के तहत चार लिंक एक्सप्रेसवे को इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर बनाने के लिए सहमति दी गई. इनमें फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेस-वे के पैकेज-1 और पैकेज-2 की कुल लंबाई करीब 90 किलोमीटर होगी.

इसके अलावा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने वाले लिंक एक्सप्रेस-वे, झांसी लिंक एक्सप्रेस-वे के पैकेज-1 और पैकेज-2 की कुल 106 किलोमीटर लंबाई तथा 74 किलोमीटर लंबे जेवर लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण की योजना है.

इन परियोजनाओं को तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. चारों परियोजनाओं पर कुल 17,542 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. निर्माण करने वाली कंपनियों को पांच साल तक एक्सप्रेस-वे के रख-रखाव की जिम्मेदारी भी निभानी होगी.

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