Vajra Prahar 2026: क्या है ‘वज्र प्रहार’? जिसके लिए भारत-अमेरिका की सेनाएं आईं साथ

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

What Is Vajra Prahar 2026: भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक और रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत होते जा रहे हैं. इसी बढ़ती साझेदारी और सैन्य सहयोग की एक और अहम झलक हिमाचल प्रदेश में देखने को मिल रही है. दुनिया के दो बड़े लोकतांत्रिक देशों भारत और अमेरिका की सेनाएं एक बार फिर साथ आई हैं. मौका है दोनों देशों के विशेष बलों के संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘वज्र प्रहार 2026’ का, जो उनकी रक्षा साझेदारी को और गहरा करता है. आइए जानते हैं इस अभ्यास के बारे में विस्तार से.

क्या है ‘वज्र प्रहार’?

‘वज्र प्रहार’ भारतीय सेना और अमेरिकी सेना के विशेष बलों के बीच आयोजित होने वाला एक महत्वपूर्ण संयुक्त सैन्य अभ्यास है. इसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करना और आधुनिक युद्ध तकनीकों व अनुभवों का आदान-प्रदान करना है. इस वर्ष इस अहम अभ्यास का 16वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है.

कब और कहां हो रहा है अभ्यास?

यह संयुक्त विशेष बल अभ्यास हिमाचल प्रदेश के बकलोह (Bakloh) स्थित ‘विशेष बल प्रशिक्षण विद्यालय’ (Special Forces Training School) में आयोजित किया जा रहा है. यह युद्धाभ्यास आज से शुरू होकर 15 मार्च 2026 तक चलेगा.

‘वज्र प्रहार’ के मुख्य उद्देश्य

इस सैन्य अभ्यास के दौरान दोनों देशों के कमांडो वास्तविक और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कठोर प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे. इसके प्रमुख लक्ष्य इस प्रकार हैं.

  • अंतर-संचालनीयता: दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना और संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता व तत्परता को बढ़ाना.
  • रणनीति का आदान-प्रदान: आधुनिक युद्ध तकनीकों, प्रक्रियाओं और ऑपरेशनल अनुभवों को साझा करना.
  • विश्वास और साझेदारी: जमीनी स्तर पर आपसी भरोसे को मजबूत करना और दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देना.
  • साझा संकल्प: वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और आतंकवाद से निपटने के लिए दोनों देशों की संयुक्त प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना.

रणनीतिक है इसके मायने?

‘वज्र प्रहार’ सिर्फ एक सैन्य अभ्यास भर नहीं है, बल्कि यह इंडो-पैसिफिक रीजन और वैश्विक स्तर पर आतंकवाद व सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत और अमेरिका के साझा संकल्प का एक कड़ा संदेश भी है. बकलोह की पहाड़ियों में साथ-साथ कठोर प्रशिक्षण लेते दोनों देशों के कमांडो इस बात का संकेत हैं कि रक्षा क्षेत्र में भारत-अमेरिका की साझेदारी भविष्य में वैश्विक सुरक्षा के लिए एक मजबूत सहारा बन सकती है.

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