नई दिल्लीः संसद का मानसून सत्र इसी महीने से शुरू हो रहा है. शनिवार को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मानसून सत्र 2026 के लिए संसद के दोनों सदनों को बुलाने की मंजूरी दे दी है. यह सत्र 20 जुलाई 2026 को शुरू होगा और 13 अगस्त 2026 तक चलेगा, जिसमें राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा और निर्णय लिए जाएंगे.
जानकारी के अनुसार, मानसून सत्र में सरकार की तरफ से कई अहम बिल पेश किए जा सकते हैं. वहीं, यह सत्र भारी हंगामेदार हो सकता है. विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा चोरी, विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक सहित कई अन्य मुद्दों को सदन में उठा सकता है.
On the recommendation of the Govt of India, Hon’ble President, Smt. Droupadi Murmu ji has approved the summoning of both the Houses of Parliament for the Monsoon Session 2026.
The Session will commence on 20 July, 2026 and continue till 13 August, 2026 for meaningful debate,… pic.twitter.com/TaEYH4F1cK— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) July 4, 2026
पिछले वर्ष 32 दिनों तक चला था सत्र
वर्ष 2025 में संसद का मानसून सत्र 32 दिनों तक चला था. सत्र 21 जुलाई 2025 से 21 अगस्त 2025 तक आयोजित किया गया था. इस दौरान दोनों सदनों में 15 विधेयक पारित किए गए थे. इस बार मानसून सत्र पिछली वर्ष की तुलना में छोटा होगा. इस बार मानसून सत्र 24 दिन का निर्धारित किया गया है.
स्पीकर TMC और UBT के बागियों पर ले सकते हैं फैसला
ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) में टूट के बाद यह संसद का पहला सत्र होगा. TMC में लोकसभा के 28 में से 20 सदस्यों ने पार्टी लीडरशिप के खिलाफ बगावत कर दी है और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया है. इसी तरह UBT के नौ लोकसभा सांसदों में से 6 एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं. इससे निचले सदन में NDA की संख्या बल मजबूत हुआ है. हालांकि, अलग गुट के तौर पर मान्यता की मांग करने वाले बागी TMC और UBT सदस्यों पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के फैसले का अभी भी इंतजार है.
बढ़ी एनडीए के सदस्यों की संख्या
अगर राज्यसभा की बात करें तो, उच्च सदन के हालिया चुनावों के बाद एनडीए के सदस्यों की संख्या में वृद्धि हुई है. यह सत्र सत्ताधारी गठबंधन और INDIA ब्लॉक, दोनों के लिए अहम हो सकता है, क्योंकि बजट सत्र निराशाजनक रहा था और संविधान संशोधन बिल लोकसभा से पास नहीं हो पाया था.

