Countries Without Rivers: जल ही जीवन है... ये सर्वविदित सत्य है. धरती पर जल के बीच जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है. हम सभी जानते हैं कि नदियों से ही हमें अपनी हर जरूरत को पूरा करने...
बढ़ती घरेलू मांग, बेहतर कीमतों और निर्यात में वृद्धि से भारत के मखाना बाजार को रफ्तार मिल रही है. सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक 2029-30 तक बाजार 12 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.