AI Security Market: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इससे जुड़े सुरक्षा जोखिम भी कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं. यही वजह है कि AI सिस्टम को सुरक्षित रखने पर होने वाला वैश्विक खर्च तेजी से बढ़ने की उम्मीद है. बुधवार को जारी गार्टनर की नई रिपोर्ट के मुताबिक, AI सुरक्षा से जुड़ा वैश्विक बाजार 2027 में करीब 4.8 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. यह 2026 के मुकाबले 68.7% अधिक होगा. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि AI सुरक्षा का यह बाजार 2028 तक बढ़कर करीब 7.7 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. यानी आने वाले वर्षों में AI के साथ-साथ उसकी सुरक्षा पर होने वाला निवेश भी तेजी से बढ़ने की संभावना है.
AI अपनाने के साथ सुरक्षा पर भी बढ़ा जोर
गार्टनर के वरिष्ठ प्रधान विश्लेषक शैलेन्द्र उपाध्याय के मुताबिक, AI सुरक्षा बाजार में इतनी तेज वृद्धि के पीछे संगठनों की बढ़ती जरूरत मुख्य वजह है. कंपनियां अब सिर्फ AI तकनीक को अपने कामकाज में शामिल करने पर ध्यान नहीं दे रही हैं, बल्कि उससे पैदा होने वाले नए सुरक्षा जोखिमों, कमजोरियों और उन्नत साइबर खतरों से बचाव को भी प्राथमिकता दे रही हैं. AI सिस्टम के बढ़ते इस्तेमाल के साथ कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी तकनीक सुरक्षित रहे और साइबर हमलों की स्थिति में जोखिम को नियंत्रित किया जा सके.
ओपन-सोर्स और थर्ड पार्टी सॉफ्टवेयर से बढ़ी चुनौती
गार्टनर की रिपोर्ट के अनुसार, AI प्रोजेक्ट्स में थर्ड पार्टी और ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल बढ़ने से सुरक्षा की नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं. सप्लाई चेन पर होने वाले साइबर हमले और AI सिस्टम में मौजूद कमजोरियां संस्थानों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर AI आधारित परियोजनाओं के लिए पर्याप्त सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो ऐसी कई परियोजनाओं के विफल होने का जोखिम बढ़ सकता है.
AI एजेंट्स पर बढ़ सकता है साइबर हमलों का खतरा
गार्टनर का अनुमान है कि 2029 तक AI एजेंट्स पर होने वाले सफल साइबर हमलों में आधे से ज्यादा हमले एक्सेस कंट्रोल से जुड़ी कमजोरियों और प्रॉम्प्ट इंजेक्शन जैसी तकनीकों का फायदा उठाकर किए जा सकते हैं. इस अनुमान के चलते AI सुरक्षा समाधानों की मांग और बढ़ने की उम्मीद है. जैसे-जैसे AI एजेंट्स और स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ेगा, उनकी सुरक्षा के लिए विशेष तकनीकों की जरूरत भी बढ़ती जाएगी.
AI एप्लिकेशन सिक्योरिटी पर सबसे ज्यादा खर्च
रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 में AI एप्लिकेशन सिक्योरिटी AI सुरक्षा खर्च की सबसे बड़ी श्रेणी बनी रह सकती है. इस क्षेत्र में करीब 851 मिलियन डॉलर खर्च होने का अनुमान है. इसके बाद AI उपयोग नियंत्रण का स्थान रहेगा, जिस पर करीब 749 मिलियन डॉलर खर्च किए जाने की संभावना है. हालांकि, विकास की रफ्तार के मामले में AI उपयोग नियंत्रण सबसे आगे रह सकता है. इस क्षेत्र में करीब 73 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है. इसके बाद AI गेटवे श्रेणी में लगभग 70.9 फीसदी की वृद्धि होने की संभावना जताई गई है.
AI गेटवे और रनटाइम सुरक्षा पर बढ़ेगा भरोसा
शैलेन्द्र उपाध्याय के अनुसार, AI रनटाइम सिक्योरिटी और समर्पित AI गेटवे जैसी तकनीकें जैसे-जैसे ज्यादा विश्वसनीय होंगी, संगठनों का इन पर भरोसा बढ़ेगा. इससे इन समाधानों का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ सकता है. उनका कहना है कि कंपनियां अपने AI कार्यक्रमों का विस्तार करेंगी तो विशेष AI सुरक्षा समाधानों की मांग भी उसी अनुपात में बढ़ती जाएगी.
पारंपरिक सुरक्षा सिस्टम के लिए नई चुनौती
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि स्वायत्त AI सिस्टम अपने साथ ऐसी नई कमजोरियां लेकर आते हैं, जिन्हें पारंपरिक निगरानी और सुरक्षा उपकरण पूरी तरह पहचानने में सक्षम नहीं हो सकते. ऐसे में संगठनों को AI मॉडल की पहचान, निगरानी और सुरक्षा के लिए विशेष समाधान अपनाने की जरूरत होगी. AI सुरक्षा की रणनीति केवल नए सुरक्षा उपकरण खरीदने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. कंपनियों को अपनी मौजूदा साइबर सुरक्षा व्यवस्था को AI सुरक्षा समाधानों के साथ जोड़ना होगा, ताकि उभरते साइबर खतरों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके.
उपाध्याय ने कहा कि पारंपरिक साइबर सुरक्षा उपकरण अक्सर AI एप्लिकेशन को सामान्य सॉफ्टवेयर की तरह देखते हैं. इसलिए AI से जुड़े खास खतरों से निपटने के लिए मौजूदा सुरक्षा प्रणालियों में बड़े स्तर पर बदलाव और अपग्रेड की जरूरत होगी. आने वाले वर्षों में AI सुरक्षा तकनीकी निवेश का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन सकती है, क्योंकि AI का इस्तेमाल जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसी के साथ इससे जुड़े साइबर जोखिम भी बढ़ते जा रहे हैं.
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