New Delhi: थाईलैंड की पुरुष कबड्डी टीम के कोच रवींद्र शेट्टी ने कहा है कि मैं पिछले तीन वर्षों से वहां कबड्डी की कोचिंग दे रहा हूं. मैंने तीन साल पहले वहां शून्य से शुरुआत की थी. मैंने हांगझोऊ एशियन गेम्स के बाद शुरुआत की थी. उसके बाद मैंने काम शुरू किया. अब कबड्डी सीखने के बाद वे आगे बढ़ रहे हैं. अब थाईलैंड में भी कबड्डी लोकप्रिय हो रही है. रवींद्र शेट्टी ने कहा कि एशियन गेम्स में देश का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल वहां इस खेल की बढ़ती लोकप्रियता का संकेत है.
थाईलैंड का यह पहला पुरुष कबड्डी मेडल
1990 में इस खेल की शुरुआत के बाद से महाद्वीपीय प्रतियोगिता में थाईलैंड का यह पहला पुरुष कबड्डी मेडल है. शुक्रवार को तोकाई सिटिजन्स जिम्नेजियम में सेमीफाइनल में भारत से 28-66 से हारने के बाद थाईलैंड ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. इस नतीजे के साथ थाईलैंड का अभियान ऐतिहासिक पोडियम फिनिश के साथ खत्म हुआ और पुरुष कबड्डी में 36 साल बाद एशियन गेम्स में उनका पहला मेडल आया. रवींद्र पिछले तीन वर्षों से थाईलैंड में कबड्डी की कोचिंग दे रहे हैं.
बिल्कुल शुरुआत से काम शुरू किया
उन्होंने कहा कि उन्होंने 2022 हांगझोऊ एशियन गेम्स के बाद वहां बिल्कुल शुरुआत से काम शुरू किया था. थाईलैंड ने सेमीफाइनल तक पहुंचने के लिए शानदार प्रदर्शन किया, जहां उनका सामना मौजूदा चैंपियन भारत से हुआ. भारतीय टीम ने मुकाबले में दबदबा बनाए रखा, हाफ-टाइम तक 37-18 की बढ़त बनाई और फिर दूसरे हाफ में अपनी बढ़त को और बढ़ाते हुए 66-28 से जीत हासिल की.
थाईलैंड में जमीनी स्तर पर कबड्डी के विकास ने गति पकड़ी
भारत ‘ग्रुप-ए’ में चार जीत के साथ बिना कोई मैच हारे सेमीफाइनल में पहुंचा था, जबकि सेमीफाइनल में पहुंचने से ही थाईलैंड का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल सुनिश्चित हो गया था. रवींद्र ने कहा कि थाईलैंड में जमीनी स्तर पर कबड्डी के विकास ने गति पकड़ी है, खासकर स्कूल प्रतियोगिताओं और युवा कार्यक्रमों के माध्यम से. उन्होंने कहा कि अभी, स्कूली स्तर पर कबड्डी शुरू हो रही है. हमारे अध्यक्ष हर चार महीने में युवा खेल आयोजित करते हैं। इसी वजह से कबड्डी का विकास हो रहा है.
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