Shashankasana Benefits: शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग को लंबे समय से जीवनशैली का हिस्सा माना जाता है. नियमित योगाभ्यास न केवल शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है, बल्कि मन को शांत रखने में भी सहायक हो सकता है. योग के कई आसनों में शशकासन एक सरल आसन है, जिसे सही तरीके से किया जाए तो शरीर और मन दोनों के लिए उपयोगी हो सकता है. शशक शब्द का अर्थ खरगोश होता है और इस आसन में शरीर की मुद्रा खरगोश जैसी दिखाई देती है, इसलिए इसे शशकासन कहा जाता है. आयुष मंत्रालय की ओर से बताए गए तरीके के अनुसार, शशकासन का अभ्यास शांत और साफ जगह पर किया जा सकता है. हालांकि, किसी भी योगासन को अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करना जरूरी है.
शशकासन कैसे करें?
शशकासन करने के लिए सबसे पहले योग मैट पर वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं. इस दौरान रीढ़ को सीधा रखें और शरीर को सहज अवस्था में रखें. अब दोनों घुटनों को धीरे-धीरे एक-दूसरे से दूर करें. पैरों के अंगूठों को आपस में मिलाकर रखें. इसके बाद गहरी सांस लें और दोनों हथेलियों को घुटनों के बीच जमीन पर रखें. अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए शरीर को आगे की तरफ झुकाएं. अपनी ठुड्डी को जमीन से लगाने का प्रयास करें और दोनों भुजाओं को सीधा और समानांतर रखें. इस मुद्रा में सामने की ओर देखते हुए सामान्य रूप से सांस लेते रहें.
शुरुआत में करीब 10 से 30 सेकंड तक इस स्थिति में अपनी क्षमता के अनुसार रहें. इसके बाद धीरे-धीरे शरीर को ऊपर उठाते हुए वापस वज्रासन की स्थिति में आ जाएं. शुरुआत करने वालों को आसन को ज्यादा देर तक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. अभ्यास बढ़ने के साथ धीरे-धीरे इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है.
शशकासन करने के क्या फायदे हैं?
शशकासन में आगे की ओर झुकने के कारण शरीर को आराम देने वाली मुद्रा बनती है. नियमित और सही अभ्यास से यह तनाव और मानसिक थकान को कम करने में मदद कर सकता है. कुछ लोगों को इस आसन के अभ्यास के बाद मन को शांत महसूस करने में भी मदद मिलती है.
पाचन के लिए हो सकता है फायदेमंद
शशकासन को पाचन तंत्र के लिए भी उपयोगी माना जाता है. नियमित अभ्यास पाचन क्रिया को बेहतर रखने और कब्ज जैसी समस्या में राहत देने में मदद कर सकता है. हालांकि, लगातार या गंभीर कब्ज की समस्या होने पर केवल योग पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
पीठ और रीढ़ के लिए उपयोगी
सही तरीके से किए जाने पर शशकासन पीठ और रीढ़ के आसपास के हिस्से में खिंचाव देने में मदद कर सकता है. इससे रीढ़ की लचक बनाए रखने में सहायता मिल सकती है. कुछ लोगों को पीठ की सामान्य जकड़न में भी आराम महसूस हो सकता है.
तनाव कम करने में मदद
योग और नियंत्रित श्वास का अभ्यास मन को शांत करने में मदद कर सकता है. शशकासन के दौरान शरीर को आगे झुकाने और कुछ समय तक स्थिर रहने से रिलैक्सेशन महसूस हो सकता है, जिससे तनाव और बेचैनी को संभालने में मदद मिल सकती है.
किन लोगों को शशकासन नहीं करना चाहिए?
शशकासन भले ही सरल दिखाई देता हो, लेकिन हर व्यक्ति के लिए यह उपयुक्त हो, ऐसा जरूरी नहीं है. अत्यधिक पीठ दर्द होने पर इस आसन का अभ्यास करने से बचना चाहिए. वहीं घुटनों की समस्या, खासकर ऑस्टियोआर्थराइटिस, वाले लोगों को भी इसे करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए.
अगर आसन करते समय दर्द, चक्कर या किसी तरह की असहजता महसूस हो तो तुरंत अभ्यास रोक दें. किसी गंभीर बीमारी, चोट या लंबे समय से चल रही स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में योग शुरू करने से पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है.
सही तरीके से करना है सबसे जरूरी
शशकासन के फायदे तभी मिल सकते हैं जब इसे सही मुद्रा और अपनी क्षमता के अनुसार किया जाए. शुरुआत में शरीर पर ज्यादा दबाव डालने के बजाय धीरे-धीरे अभ्यास करना चाहिए. योग को किसी बीमारी का इलाज मानने के बजाय स्वस्थ जीवनशैली के एक हिस्से के रूप में अपनाना बेहतर है.
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