ईरान की ओर पहले से बड़ा नौसैनिक बेड़ा भेज रहा अमेरिका, ट्रंप बोले- समझौते से बात नहीं बनी तो दूसरे रास्‍ते भी तैयार

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Donald Trump: अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु हथियारों को लेकर लंबे समय से तनाव चल रहा है. ऐसे में ही अब अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप ने ईरान की ओर पहले से भी बड़ा नौसैनिक बेड़ा भेजने की योजना बनाई है. ट्रंप का कहना है कि वॉशिंगटन बातचीत के जरिए समझौता चाहता है, लेकिन अगर बात नहीं बनी तो दूसरे रास्तों के लिए भी तैयार है.

ट्रंप ने बताया कि यह तैनाती अमेरिका की उस नौसैनिक मौजूदगी से भी बड़ी होगी, जो पहले वेनेजुएला के पास थी. उन्होंने इसे एक बड़ा जहाज़ी बेड़ा बताया. उनका कहना है कि इस कदम का मकसद दबाव बढ़ाना है, जबकि बातचीत की कोशिशें जारी रहेंगी. ट्रंप ने कहा कि “हम अब ईरान की ओर ज्यादा संख्या में जहाज भेज रहे हैं. उम्मीद है कि समझौता हो जाएगा.”

ट्रंप ने नहीं दिया स्‍पष्‍ट रूप से कोई जवाब

वहीं, ईरान को पहले से दी गई कोई समय सीमा को लेकर किए सवाल में उन्‍होंने स्‍पष्‍ट रूप से कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन उन्‍होंने इतना जरूर कहा कि यह बात केवल ईरान ही ठीक से जानता है. ट्रंप ने यह भी पुष्टि की कि उनका ईरान से सीधे संपर्क हुआ है. जब उनसे पूछा गया कि क्या संदेश ईरान के नेताओं तक पहुंचा है, तो उन्होंने कहा, “हां, पहुंचा है.”

उन्होंने कहा कि अमेरिका बातचीत से हल निकालना चाहता है, लेकिन हालात बिगड़ने की संभावना को भी नकारा नहीं. ट्रंप बोले, “अगर समझौता हो गया तो अच्छा है. अगर नहीं हुआ, तो आगे देखा जाएगा.”

अमेरिका के पास दुनिया का सबसे शक्तिशाली जहाज

ट्रंप ने अमेरिका की सैन्य ताकत पर जोर देते हुए किसी खास कार्रवाई का विवरण नहीं दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास “दुनिया के सबसे शक्तिशाली जहाज” हैं और इस तैनाती को रोकथाम की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा बताया.

उन्होंने सैन्य योजनाओं के समय और नियमों पर बात करने से इनकार किया. ट्रंप ने कहा कि वह सैन्य मामलों पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बताना चाहते. ये बयान व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हुए एक कार्यक्रम के दौरान आए, जहां घरेलू आयोजनों के बीच ट्रंप ने विदेश नीति, रक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़े सवालों के जवाब दिए.

अमेरिका-ईरान के रिश्‍तों में तनाव

अमेरिका और ईरान के रिश्ते कई सालों से तनाव में हैं. इसकी वजह प्रतिबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे रहे हैं. पहले भी बातचीत के कई दौर हुए, लेकिन सीमित सफलता मिली और टकराव की स्थिति बार-बार बनी.

अमेरिका ने इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने के समय नौसैनिक तैनाती का इस्तेमाल अक्सर रोकथाम और संकेत दोनों के रूप में किया है, जबकि यह भी कहा है कि वह कूटनीतिक समाधानों के लिए खुला है.

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