Union Budget 2026-27: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करने वाली हैं. अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, इस बार के बजट में रक्षा, बुनियादी ढांचा, पूंजीगत खर्च (कैपेक्स), बिजली क्षेत्र और किफायती आवास के विकास को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है.
इसके साथ ही सरकार सामाजिक कल्याण और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन साधने की कोशिश करेगी. नीति निर्माताओं के सामने आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की दोहरी चुनौती रहेगी, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.
विकास और राजकोषीय घाटे के बीच संतुलन
इस बजट में आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने और राजकोषीय घाटे को काबू में रखने के बीच संतुलन साधने की कोशिश होगी. विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में उन तात्कालिक चुनौतियों को भी ध्यान में रखा जाएगा, जो बदलते वैश्विक और भू-राजनीतिक हालात से पैदा हो रही हैं.
सरकार लगातार राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के रास्ते पर आगे बढ़ती रही है. कोविड काल के दौरान राजकोषीय घाटा 9.2 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गया था, जिसे अब घटाकर अनुमानित रूप से वित्त वर्ष 2025-26 में 4.4 प्रतिशत तक लाया गया है.
15वां बजट और ऐतिहासिक उपलब्धि
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार आगे भी वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर जोर देगी और इस मोर्चे पर किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का 15वां बजट पेश करेंगी.
यह 2024 में एनडीए सरकार के लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने के बाद दूसरा पूर्ण बजट होगा. इसके साथ ही निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार बजट पेश करने वाली देश की पहली महिला वित्त मंत्री बन जाएंगी.
टैक्स राहत बनाम कैपेक्स रणनीति
विशेषज्ञों ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 का बजट मध्यम वर्ग की खपत बढ़ाने के लिए टैक्स राहत पर ज्यादा केंद्रित था, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में खपत बढ़ाने का तरीका ज्यादा चुनिंदा और सीमित हो सकता है. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड की इंडिया स्ट्रैटेजी रिपोर्ट के अनुसार, इस बार के बजट में पूंजीगत खर्च को लेकर सरकार का रुख आक्रामक रह सकता है, खासतौर पर उन क्षेत्रों में जिन्हें मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के चलते रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
निवेशकों की नजर और ग्रोथ अनुमान
वहीं DBS बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशकों की नजर अगले वित्त वर्ष के बजट में सरकार के कर्ज स्तर, राजकोषीय घाटे और उधारी से जुड़े आंकड़ों पर टिकी रहेगी. बॉन्ड बाजार के लिहाज से सरकार की कुल उधारी का आकार अहम माना जा रहा है.
इसके अलावा इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में देश की अर्थव्यवस्था का विस्तृत विश्लेषण पेश किया गया है. इसमें FY26-27 के लिए 6.8 से 7.2 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान लगाया गया है, जो मौजूदा वर्ष की 7.4 प्रतिशत की दर से थोड़ा कम है, लेकिन बाजार के अनुमानों से बेहतर है.
बजट के दिन शेयर बाजार खुला रहेगा
खास बात यह है कि 1 फरवरी को रविवार होने के बावजूद भारतीय शेयर बाजार खुले रहेंगे. केंद्रीय बजट 2026-27 के दिन शेयर बाजार में सामान्य ट्रेडिंग सेशन आयोजित किया जाएगा.