INDIA की सरकार को सस्ती सोच बताने वाले US नेता के बेटे की लग गई क्लास, सोशल मीडिया पर निकल गई हेकड़ी!

New Delhi: अमेरिकी नेता निक्की हेली के बेटे नलिन हेली के उस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई, जिसमें उन्होंने भारत की सरकार को सस्ती सोच वाला बता दिया. बयान के बाद उनकी क्लास लग गई. कई अमेरिकी और भारतीय यूजर्स ने उन्हें जियोपॉलिटिक्स की बुनियादी समझ न होने का आरोप लगाया. नलिन हेली के बयान ने भारत-अमेरिका के रिश्तों पर बहस छेड़ दी. नलिन ने भारत को अमेरिका का खराब सहयोगी बताया.

ईरान से सस्ता तेल खरीदता है भारत

नलिन हेली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भारत अमेरिका को सस्ता श्रम भेजता है. ईरान से सस्ता तेल खरीदता है और रूस से हथियार लेता है, क्योंकि भारत की सरकार सस्ती सोच वाली है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका को सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि कई तथाकथित सहयोगी देशों के साथ अपने रिश्तों पर दोबारा विचार करना चाहिए.

अमेरिकी घरेलू राजनीति से जुड़ा बयान

यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच महीनों की बातचीत के बाद एक बड़े व्यापार समझौते की संभावनाएं बन रही हैं. यही वजह है कि नलिन हेली की टिप्पणी को कई लोग सिर्फ व्यक्तिगत राय नहीं बल्कि अमेरिकी घरेलू राजनीति से जुड़ा बयान मान रहे हैं. नलिन हेली का यह बयान एक पुराने वीडियो के जवाब में आया.

वीडियो हाल ही में फिर से वायरल

यह वीडियो 2023 का है, जिसमें अमेरिकी नेता विवेक रामास्वामी चीन से दूरी बनाने और भारत के साथ रणनीतिक रिश्ते बढ़ाने की बात कर रहे थे. यह वीडियो हाल ही में फिर से वायरल हुआ क्योंकि अमेरिका में मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) समर्थकों का एक धड़ा विवेक रामास्वामी के ओहायो गवर्नर चुनाव अभियान को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है.

राष्ट्रपति चुनाव अभियान में भी सक्रिय रहे हैं हेली

नलिन हेली जो रामास्वामी के खुले आलोचक रहे हैं, उसी संदर्भ में भारत पर निशाना साधते नजर आए. हालांकि नलिन हेली किसी सरकारी पद पर नहीं हैं लेकिन वह खुद को MAGA समर्थक आवाज के रूप में पेश करते हैं और निक्की हेली के राष्ट्रपति चुनाव अभियान में भी सक्रिय रहे हैं. उनकी पहचान सोशल मीडिया पर तीखे और उकसाने वाले पोस्ट्स के लिए भी रही है.

औपचारिक गठबंधन की इजाजत नहीं

एक अमेरिकी यूजर ने लिखा कि भारत कभी भी अमेरिका का ‘Ally’ (मित्र) रहा ही नहीं है. भारत की विदेश नीति किसी के साथ औपचारिक गठबंधन की इजाजत नहीं देती. भारत सिर्फ रणनीतिक साझेदारी करता है और यह बात अमेरिकी विदेश मंत्रालय अच्छी तरह समझता है लेकिन सोशल मीडिया पर शोर मचाने वालों को इसका ज्ञान नहीं.

तो फिर बाकी अमेरिकी क्या?

एक अन्य यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि अगर भारतीय सस्ता श्रम हैं तो फिर बाकी अमेरिकी क्या हैं? इस पोस्ट के साथ एक ग्राफ भी साझा किया गया, जिसमें दिखाया गया कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय अमेरिका की सबसे अधिक औसत पारिवारिक आय वाली कम्युनिटीज में शामिल है.

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