Israel Election 2026: इजरायल चुनाव में वोटों की गिनती हो चुकी है, जिसका फाइनल रिजल्ट भी सामने आ चुका है. शुक्रवार की सुबह जारी अंतिम नतीजों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी विपक्ष से आगे तो रही, लेकिन बहुमत के आंकड़े को नहीं पार कर सकी. नेतान्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन ने नेसेट (इजरायली संसद) की 120 सीटों में से 53 सीटें जीती हैं. नेतन्याहू की अपनी लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी रही. वहीं गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट ने 48 सीटें हासिल कीं.
लेकिन असली खेल तो अरब पार्टियों ‘राआम’ और ज्वाइंट लिस्ट का है, जिसने 19 सीटें जीती हैं. गठबंधन की बातचीत में ये दोनों पार्टियां ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती हैं. इसी बीच नेतन्याहू की पार्टी ने इन दोनों अरब पार्टियों पर चुनाव में धांधली के बेबुनियाद आरोप लगाए. लिकुड का दावा है कि इन पार्टियों को वोट खरीदने के लिए कतर से फंड मिले है.
दोनों पार्टियां एक दूसरे पर लगा रही आरोप
लिकुड पार्टी का कहना है कि “रामगेट घोटाला एक राजनीतिक भूकंप है. इजरायल के चुनाव चुरा लिए गए हैं.” लेकिन अरब पार्टियों और कतर ने इन आरोपों को खारिज कर दिया. ‘राआम’ के नेता मंसूर अब्बास ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया और जांच का स्वागत किया. वहीं ‘जॉइंट लिस्ट’ ने नेतन्याहू और उनके सहयोगियों पर आरोप लगाया कि वे अरब मतदाताओं के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव से डरकर “उकसावे का अभियान” चला रहे हैं. जबकि विपक्षी नेता आइसेनकोट ने नेतन्याहू पर चुनाव नतीजों को “अवैध” ठहराने की कोशिश करने का आरोप लगाया.
हालांकि सरकार अभी भी नेतन्याहू के हाथ में है यानी हर एजेंसी उनके पास है. ऐसे में इजरायल की घरेलू सुरक्षा एजेंसी ‘शिन बेट’ ने कहा कि वह कथित धांधली की जांच कर रही है. साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मकसद “उन लोगों पर सवाल उठाना या उन्हें दोषी ठहराना नहीं है, जिन्होंने लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से अपने वोट डाले हैं”.
सामने आई कुछ जानकारियां पूरी तरह से निराधार
दबाव में किंगमेकर
‘जॉइंट लिस्ट’ के प्रमुख यूसुफ जबरीन ने बताया कि वह नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए विपक्ष के साथ सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन वे विपक्ष के साथ मिलकर सरकार में शामिल नहीं होंगे. वहीं इजरायली मीडिया के मुताबिक, रा’म पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने कहा है कि गादी आइजनकोट के नेतृत्व में अल्पमत सरकार बनना नामुमकिन है. गादी आइजनकोट यशर पार्टी के अध्यक्ष हैं और यह सरकार अरब पार्टियों के बाहर से समर्थन से बननी थी. मंसूर अब्बास ने पार्टी के सदस्यों के साथ बैठक के दौरान यह बात कही.

