Investment Tips for Women: आज के समय में महिलाओं के लिए आर्थिक रूप से मजबूत होना बेहद जरूरी है. अच्छी कमाई के साथ उस पैसे को सही जगह लगाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि निवेश की शुरुआत किस उम्र में करनी चाहिए और अपनी आय का कितना हिस्सा इसके लिए अलग रखना चाहिए. इसी को आसान बनाने के लिए उम्र के हिसाब से निवेश का एक फॉर्मूला बताया गया है, जिसमें 20, 30 और 40 की उम्र के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय किए गए हैं.
इस तरीके के मुताबिक, 20 साल की उम्र में कमाई का 10%, 30 साल की उम्र में 30% और 40 साल की उम्र में 50% हिस्सा निवेश के लिए अलग करने का लक्ष्य रखा जा सकता है. साथ ही निवेश को ऑटोमेटिक रखने पर जोर दिया गया है, ताकि हर महीने के आखिर में पैसा बचने का इंतजार न करना पड़े.
क्या है 10-30-50 का फॉर्मूला?
इस फॉर्मूले के तहत 20 साल की उम्र में टैक्स कटने के बाद हाथ में आने वाली आय का करीब 10% निवेश करने की शुरुआत की जा सकती है. इसके बाद 30 की उम्र में निवेश का हिस्सा बढ़ाकर करीब 30% करने का लक्ष्य रखा जा सकता है. वहीं 40 साल की उम्र में रिटायरमेंट को ध्यान में रखते हुए अपनी आय का करीब 50% निवेश करने की कोशिश की जा सकती है. निवेश को नियमित बनाए रखने के लिए SIP का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे हर महीने तय रकम अपने आप निवेश हो जाती है और महीने के अंत में बची रकम से निवेश करने की स्थिति नहीं बनती.
निवेश से पहले इन चीजों को मजबूत करना जरूरी
सिर्फ निवेश शुरू कर देना ही पर्याप्त नहीं है. अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के बाद निवेश की योजना बनाना भी जरूरी है. इसके लिए कुछ अहम बातों का ध्यान रखना चाहिए.
परिवार के लिए पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस रखें
अपने और परिवार के लिए पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस होना जरूरी है. इससे अचानक आने वाले बड़े स्वास्थ्य खर्चों का आर्थिक असर कम करने में मदद मिल सकती है.
सभी लोन और कर्ज की जानकारी रखें
परिवार में चल रहे लोन और दूसरे कर्जों की पूरी जानकारी अपने पास रखें. इससे यह समझने में आसानी होगी कि आपकी आय का कितना हिस्सा निवेश के लिए वास्तव में उपलब्ध है.
महंगे कर्ज को बढ़ने न दें
क्रेडिट कार्ड जैसे महंगे कर्ज को लंबे समय तक बढ़ने नहीं देना चाहिए. निवेश के साथ-साथ ऐसे कर्ज को नियंत्रित करना भी आर्थिक योजना का जरूरी हिस्सा है.
छह महीने का इमरजेंसी फंड तैयार रखें
कम से कम छह महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड बनाने का लक्ष्य रखें. अचानक किसी आर्थिक जरूरत के समय यह रकम काफी काम आ सकती है.
इमरजेंसी फंड ऐसी जगह रखें जहां पैसा आसानी से मिले
आपातकालीन फंड को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां जरूरत पड़ने पर रकम आसानी से निकाली जा सके. इस पैसे का मुख्य उद्देश्य मुश्किल समय में तुरंत आर्थिक सहारा देना है, न कि ज्यादा रिटर्न हासिल करना.
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